136 कॉलेजों के शिक्षकों ने खोला पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा, कर दिया बड़ा ऐलान

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 01 Aug, 2026 05:44 PM

teachers from 136 colleges have launched a protest against the punjab government

पंजाब एंड चंडीगढ़ कॉलेज टीचर्स यूनियन (पीसीसीटीयू) ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि प्रदेश के 136 सरकारी सहायता प्राप्त (एडेड) कॉलेजों के शिक्षकों को पिछले पांच महीनों से वेतन अनुदान (सैलरी ग्रांट) जारी नहीं किया गया है। यूनियन ने इस मुद्दे को...

पंजाब डैस्क : पंजाब एंड चंडीगढ़ कॉलेज टीचर्स यूनियन (पीसीसीटीयू) ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि प्रदेश के 136 सरकारी सहायता प्राप्त (एडेड) कॉलेजों के शिक्षकों को पिछले पांच महीनों से वेतन अनुदान (सैलरी ग्रांट) जारी नहीं किया गया है। यूनियन ने इस मुद्दे को लेकर राज्यव्यापी संघर्ष शुरू करने का ऐलान किया है।

यूनियन के अनुसार, मार्च से जून 2026 तक चार महीनों के वेतन अनुदान का लगभग 73 करोड़ 62 लाख रुपये का बिल पिछले चार दिनों से वित्त विभाग द्वारा खजाना कार्यालय में लंबित रखा गया है, लेकिन सरकार इसे जानबूझकर जारी नहीं कर रही।

पीसीसीटीयू की कार्यकारिणी की आपात बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी देते हुए संगठन के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने महिलाओं के खातों में 'टूं-टूं' (योजनाओं के तहत राशि ट्रांसफर) करने के लिए 136 एडेड कॉलेजों के शिक्षकों की पांच महीने की तनख्वाह दांव पर लगा दी है।

यूनियन ने कहा कि प्रदेश के हजारों शिक्षक पिछले पांच महीनों से नियमित वेतन के लिए परेशान हैं। उनका आरोप है कि आम आदमी पार्टी सरकार के पूरे कार्यकाल में उच्च शिक्षा विभाग और वित्त विभाग समय पर वेतन अनुदान जारी करने में पूरी तरह विफल रहे हैं, जिससे शिक्षकों को अपने परिवार का गुजारा चलाने के लिए महीनों तक वेतन का इंतजार करना पड़ता है।

सरकार को चेतावनी

पीसीसीटीयू के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह धालीवाल और महासचिव बी.बी. यादव ने संयुक्त बयान में कहा कि यदि सरकार ने तत्काल प्रभाव से वेतन अनुदान जारी नहीं किया तो राज्य के 136 एडेड कॉलेजों के शिक्षक और छात्र मिलकर सरकार की शिक्षा नीतियों और कार्यप्रणाली के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन करेंगे।

शिक्षा और वित्त मंत्रियों पर भी सवाल

यूनिवर्सिटी और कॉलेज शिक्षकों के राष्ट्रीय संगठन एआईएफसीटीओ के राष्ट्रीय सचिव डॉ. विनय सोफत ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार शिक्षकों को नियमित वेतन देने में सक्षम नहीं है तो उसे राजनीतिक लाभ के लिए सरकारी खजाने से मुफ्त सुविधाएं बांटने का नैतिक अधिकार नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने राजनीतिक हितों के लिए शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही है और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एडेड कॉलेजों के शिक्षकों का वेतन नियमित नहीं किया गया तो सरकार की शिक्षा और वित्त नीतियों की वास्तविकता को पंजाब ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी छात्रों और जनता के सामने लाया जाएगा।

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