पंजाब के व्यापारियों ने दी आंदोलन की चेतावनी, सरकार तुरंत कदम उठाए, वरना बिगड़ेंगे हालात...

Edited By Vatika,Updated: 25 Nov, 2025 10:23 AM

punjab traders have warned of agitation

सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए, वरना हालात और बिगड़ेंगे। कारोबारी विवेक वर्मा ने व्यापारिक माहौल को लेकर कहा...

लुधियाना (सेठी) : जी.एस.टी और वैट के लंबित रिफंड को लेकर पंजाब के व्यापारियों में नाराज़गी लगातार बढ़ रही है। विभिन्न व्यापारिक संगठनों का कहना है कि पिछले 7–8 महीनों से मुद्दे को सरकार के समक्ष कई बार उठाए जाने के बावजूद रिफंड जारी नहीं किए गए। सूचनाओं के अनुसार अगस्त माह में केवल 220 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ, जबकि लगभग 650 करोड़ रुपए अभी भी लंबित हैं। व्यापारियों ने बताया कि यह मामला कई बार लुधियाना डी.टी.सी. रणधीर कौर के समक्ष रखा गया, जिन्होंने वैबसाइट अपग्रेडेशन पूरा होते ही रिफंड जारी करने का आश्वासन दिया था।

इसी तरह पंजाब ट्रेड कमीशन के अध्यक्ष अनिल ठाकुर के लुधियाना दौरे में भी व्यापारिक संगठनों ने समस्या से अवगत कराया, और तब भी सरकार की ओर से जल्द समाधान का भरोसा दिया गया था। व्यापारिक संगठनों का आरोप है कि सरकार व्यापार जगत की समस्याओं के प्रति उदासीन बनी हुई है। पहले से ही कमजोर पड़ चुके व्यापारिक माहौल में कानून-व्यवस्था की चुनौतियां और कारोबार विरोधी नीतियां निवेशकों को पंजाब से दूर कर रही हैं। पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के महासचिव सुनील मेहरा ने कहा है कि यदि जल्द ही लंबित रिफंड जारी नहीं किए गए, तो वे राज्यस्तरीय धरने के लिए बाध्य होंगे। इसके साथ ही जल्द ही राज्य भर के व्यापारियों की एक बड़ी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। लुधियाना के कारोबारी राजेश ढांडा ने कहा, 650 करोड़ रुपए का लंबित रिफंड छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ रहा है।

सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए, वरना हालात और बिगड़ेंगे। कारोबारी विवेक वर्मा ने व्यापारिक माहौल को लेकर कहा,“पंजाब में पहले ही निवेशक भरोसा कमजोर है। रिफंड में देरी से हालात और खराब हो रहे हैं। सरकार को पारदर्शी और तेज़ व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। छोटे उद्यमियों की मुश्किलों पर विवेक जिंदल ने कहा, रिफंड का पैसा कारोबारियों का कैपिटल है, यदि कारोबारियों के पास पैसा ही नहीं होगा , तो व्यापार कैसे चलेगा। उद्योगों के भविष्य को लेकर कारोबारी एस.एस. खुराना ने बताया कि,“यदि सरकार ने समय पर रिफंड जारी नहीं किए तो उद्योगों का पलायन और बढ़ेगा। कई यूनिट पहले ही बंद हो चुकी हैं।

 

 

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