Edited By Vatika,Updated: 03 Jul, 2018 05:36 PM

पंजाब सरकार पराली जलाने की समस्या से निजात पाने के लिए किसानों को पराली प्रबंधन मशीनरी पर सब्सिडी मुहैैया कराएगी। सहकारी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (विकास)विश्वजीत खन्ना ने आज यहां बताया कि फसल अवशेष के प्रबंधन के लिए कृषि मशीनकरण को बढ़ावा देने...
चंडीगढ़ः पंजाब सरकार पराली जलाने की समस्या से निजात पाने के लिए किसानों को पराली प्रबंधन मशीनरी पर सब्सिडी मुहैैया कराएगी। सहकारी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (विकास)विश्वजीत खन्ना ने आज यहां बताया कि फसल अवशेष के प्रबंधन के लिए कृषि मशीनकरण को बढ़ावा देने पर दो वर्षों में 665 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
जल्द ही बड़े स्तर पर चलाई जाएगी मुहिम
उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत कृषि मशीनरी पर सहकारी सोसायटियों और अन्य समूहों को 80 प्रतिशत श्री मुहैया करवाई जाएगी ,जबकि किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर मशीनरी दी जाएगी। खन्ना ने कहा कि पराली न जलाने के लिए कई सालों से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन पराली के निपटारे के लिए कोई उचित तकनीक उपलब्ध नहीं थी। धान की कटाई व गेहूं और सब्जियों की बिजाई में कम समय होने के कारण किसान आम तौर पर पराली जलाने को तरजीह देते थे। इसलिए मैकेनिकल तरीकों पर काम किया गया व इस बारे में जल्द ही बड़े स्तर पर मुहिम चलाई जाएगी। उनके अनुसार इस मुहिम में मशीनीकरण के दुष्प्रभावों की शंकाओं को दूर किए जाने तथा पराली प्रबंधन मशीनरी के उपयोग के लिए प्रशिक्षित करने पर ध्यान दिया जाएगा। सोशल मीडिया प्लेटफार्म, व्हाट्सएप, डाक्यूमेंट्री, रेडियो जिंगलस व प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से प्रगतिशील किसानों को साथ जोडऩे के लिए कृषि विभाग कई गतिविधियां चला रहा है ।
फसलों के अवशेष जलाने से पैदा होगा पर्यावरण प्रदूषण
खन्ना ने कहा कि पराली प्रबंधन मशीनी पर सब्सिडी हासिल करने वाले किसानों के लिए यह लाजिमी बनाया जाए कि यदि वे फसल अवशेष को नहीं जलाते तो सब्सिडी राशि सरकार को वापस करनी होगी। इस मौके पर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना के वाइस चांसलर बलदेव सिंह ढिल्लों ने कहा कि फसलों के अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है। इसलिए कृषि विश्वविद्यालय फसल अवशेष मैनेजमेंट व किसानों को जागरुक करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसके अंतर्गत हजारों किसानों को उन खेतों का दौरा करवाया गया जहां हैप्पी सीडर व मल्चर्स के माध्यम से सफलता पूर्वक पराली का प्रबंधन किया गया। इस मौके पर कृषि विभाग के सचिव काहन सिंह पन्नू, सूचना एवं लोक संपर्क विभाग की निदेशक अनंदिता मित्रा, कृषि विभाग व किसान भलाई कार्पोरेशन के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा बागवानी, भूमि संभाल, पशु पालन, ग्रामीण विकास व पंचायत, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, कृषि यूनिवर्सिटी लुधियाना के वैज्ञानिक, कृषि खोज के बारे में भारतीय कौंसिल के जोनल सेंटर लुधियाना के अधिकारी व प्रतिनिधि उपस्थित थे।