Hot Seat बना अमृतसर विधानसभा का ये हल्का, जाने क्यों टिकी हैं सबकी नजरें

Edited By Sunita sarangal, Updated: 27 Jan, 2022 03:38 PM

political war between navjot singh sidhu and bikram singh majithia

पंजाब विधानसभा चुनाव इस बार बहुत ही दिलचस्प हो रहा है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि इस बार तस्वीर साफ नहीं हो रही कि आखिर पंजाब.........

जालंधर(सुनीता सरंगल): पंजाब विधानसभा चुनाव इस बार बहुत ही दिलचस्प हो रहा है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि इस बार तस्वीर साफ नहीं हो रही कि आखिर पंजाब में किसकी सरकार बनेगी। जहां एक तरफ कैप्टन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद नई पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस बना ली और साथ ही भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया तो दूसरी ओर कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के लिए एक नहीं दो नहीं 3-3 दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी भी चुनावों के किए गए सर्वे अनुसार जीत हासिल कर सकती है। अब देखना यह होगा कि आखिर विधानसभा चुनावों का नतीजा क्या निकलता है लेकिन इससे पहले होने वाली जंग भी कम दिलचस्प नहीं है। 

खास बात यह है कि इस समय सबसे अधिक चर्चा में आने वाली सीट है अमृतसर पूर्वी सीट। ऐसा इसलिए क्योंकि केवल इसी सीट पर दो बड़े दिग्गज चुनावी मैदान में एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं। जी हां, एक तरफ पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू हैं तो दूसरी तरफ शिरोमणि अकाली दल के बिक्रम सिंह मजीठिया। वैसे तो बिक्रम सिंह मजीठिया पर ड्रग मामले में गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है लेकिन उन्हें इस केस में फंसाने वाले भी नवजोत सिद्धू ही हैं। नवजोत सिद्धू ही ऐसे शख्स हैं जिन्होंने ड्रग मामले को इतना उठाया था और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग के चलते अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया है। मजबूरन सरकार को मजीठिया पर केस दर्ज करना ही पड़ा। ऐसे में एक सीट के लिए दोनों विरोधियों की टक्कर सच में देखने लायक होगी।

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जो जीता वो सिकंदर
आपको बता दें कि सिद्धू और मजीठिया दोनों ही राजनीति के बड़े पक्के खिलाड़ी हैं। जहां मजीठिया लगातार 3 बार जीते हैं वहीं सिद्धू की भी कभी हार नहीं हुई। तो देखना यह होगा कि इस बार जीत किसकी होती है। अगर मजीठिया जीत जाते हैं तो उनका राजनीति में नाम बहुत ऊंचा हो जाएगा। वहीं दूसरी तरफ अगर सिद्धू हार जाते हैं तो उन्हें नुकसान भी झेलना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि सिद्धू लगातार पंजाब के मुख्यमंत्री पद के लिए खुद को दावेदार बता रहे हैं। अगर सिद्धू यह चुनाव हार जाते हैं तो उनका मुख्यमंत्री बनने का सपना टूट जाएगा। एक यह भी कारण है कि सबकी नजरें विधानसभा चुनाव में इसी सीट पर टिकी रहेंगी। पर इतना तो तय है कि जो भी कोई इस सीट से हारेगा उसकी यह पहली राजनीतिक हार होगी।

बाकी दिग्गज लड़ रहे सेफ लड़ाई
आगामी विधानसभा चुनावों में केवल अमृतसर पूर्वी सीट ही एक ऐसी सीट है जहां दो बड़े दिग्गज आमने-सामने आ गए हैं। सिद्धू और मजीठिया के इलावा किसी और बड़े दिग्गजों का आपस में सामना नहीं हो रहा है। पिछले विधानसभा चुनावों में कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रकाश सिंह बादल आमने-सामने आए थे। इसके साथ ही सुखबीर सिंह बादल और भगवंत मान ने भी एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था लेकिन इस बार सभी बड़े खिलाड़ी सेफ सीट से लड़ाई कर रहे हैं। सिर्फ अमृतसर पूर्वी ही एक ऐसी सीट है जिस पर दो बड़े राजनेता आमने-सामने आए हैं तो ऐसे में इस सीट पर सबका ध्यान आकर्षित होना आम बात है।

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कांग्रेस का सीट पर है ज्यादा दबदबा
आपको बता दें कि अमृतसर पूर्वी सीट पर कांग्रेस का ज्यादा दबदबा है। यदि हम पिछले कुछ विधानसभा चुनावों की बात करें तो इस सीट पर ज्यादातर कांग्रेस को ही जीत प्राप्त हुई है। इतना ही नहीं 2012 में नवजोत सिद्धू की धर्मपत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने इस सीट से चुनाव जीता था। हालांकि वह कांग्रेस नहीं बल्कि अकाली-भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर खड़ी हुई थीं लेकिन बाद में उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया था। जानकारी के लिए आपको बता दें कि नवजोत सिद्धू ने 2017 में इसी सीट से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। अब देखना यह होगा कि क्या एक बार फिर सिद्धू की इस सीट पर जीत होती है या मजीठिया बाजी मार ले जाते हैं।

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