खालिस्तान बनाने का मतलब हिंदू-सिखों को 1947 जैसे उजाड़ना हैः निमिशा मेहता

Edited By Mohit,Updated: 07 Jun, 2020 07:04 PM

nimisha mehta taking about khalistan

ज्ञानी हरप्रीत सिंह और एस.जी.पी.सी. के प्रधान गोबिंद सिंह लौंगोवाल द्वारा खालिस्तान की मांग..............

होशियारपुरः ज्ञानी हरप्रीत सिंह और एस.जी.पी.सी. के प्रधान गोबिंद सिंह लौंगोवाल द्वारा खालिस्तान की मांग के समर्थन पर बोलते हुए कांग्रेसी नेता निमिशा मेहता ने कहा कि एस.जी.पी.सी. के इन पदाधिकारियों की वजह से शिरोमणि अकाली दल बादल एक बार फिर खालिस्तान के मुद्दे को हवा दे रहा है। उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि एस.जी.पी.सी. में बादल परिवार की सहमति के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। आज जब पंजाब में हिंदू-सिख भाईचारक सांझ मजबूत हो चुकी है तो ऐसे वक्त में नौजवानों को खालिस्तान की मांग के लिए भड़काने और हौसला अफजाई करना नौजवानों को साफ-साफ अलगाववाद के रास्ते पर चलाना है। कांग्रेसी नेता ने बताया कि पिछले तीन-चार सालों में अमृतसर, तरनतारन और बटाला में नौजवानों को पकड़ा गया जिनको विदेशी ताकतों धर्म और खालिस्तान के नाम पर हथियार और नशा तस्करी की तरफ धकेला गया। उन्होंने कहा कि एस.जी.पी.सी. के इन पदाधिकारियों की वजह से नौजवान हथियार उठाते हैं और फिर कत्लेआम होते हैं और इन सबका जिम्मेदार यह पदाधिकारी और शिरोमणि अकाली दल बादल ही होगा।

ज्ञानी हरप्रीत सिंह और गोबिंद सिंह लौंगोवाल द्वारा खालिस्तान मांगने के सहयोग को जायज और हर सिख की मांग पर सवाल खड़े करते हुए निमिशा ने कहा कि हरप्रीत सिंह और लौंगोवाल खालिस्तान की मांग करके क्या दिल्ली, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, बिहार, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में रहते सिखों को उजाड़ना चाहते हैं या पंजाब में रहते हिंदुओं को बाहर निकालना चाहते हैं। निमिशा ने कहा कि पंजाब के बाहर बैठा कोई भी सिख अपना घर और कारोबार छोड़कर उजड़कर यहां रहना पसंद नहीं करेगा और इस बात की पुष्टि वह सर्वेक्षण के जरिए भी करवा सकते हैं। निमिशा ने कहा कि खालिस्तान बनाने का मतलब पंजाब के हिंदुओं और पंजाब के बाहर बैठे सिखों को एक बार फिर 1947 जैसा माहौल दिखाने जैसा है। 

इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि खालिस्तान की मांग करने वाले क्या श्री पटना साहिब, श्री नांदेड़ साहिब और श्री पाऊंटा साहिब जैसे पवित्र गुरु घरों से सिखों को दूर करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के लिए सारे जगत में बादल दल बदनाम है। जिसका सबूत 2017 के विधानसभा चुनाव हैं। अब 2022 के चुनाव नजदीक आते देख नौजवानों में खालिस्तान का मसला उभार कर यह लोग सिखों की धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं। निमिशा ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल में मैंबर और पदाधिकारी बने हिंदू अपने प्रधान सुखबीर सिंह बादल को पूछें कि अलग सिख राज्य खालिस्तान बनाकर वह हिंदुओं को पंजाब से उजाड़ कर बाहर क्यों निकलना चाहते हैं और आज तक सुखबीर बादल उनके परिवार और पार्टी द्वारा आतंकवाद के दौरान 35000 के करीब कत्ल किए गए मासूम हिंदुओं की मौत पर अफसोस तक क्यों नहीं किया गया। 


 

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