अकाली यदि खेती कानून के विरोधी हैं तो भाजपा नेताओं का घेराव करें: निमिशा मेहता

Edited By Vatika,Updated: 21 Sep, 2020 04:15 PM

nimisha mehta speak against akali bjp on agriculture ordinance

गढ़शंकर में कांग्रेसी नेता निमिशा मेहता और उनके साथियों ने रोष मार्च निकाल कर बंगा चौक गढ़शंकर में भाजपा द्वारा पास किए नए खेती बिलों के विरोध में प्रदर्शन किया।

गढ़शंकर: गढ़शंकर में कांग्रेसी नेता निमिशा मेहता और उनके साथियों ने रोष मार्च निकाल कर बंगा चौक गढ़शंकर में भाजपा द्वारा पास किए नए खेती बिलों के विरोध में प्रदर्शन किया। इस मौके पर उन्होंने भाजपा और उसके सहयोगी पार्टी अकाली दल के विरुद्ध जमकर नारेबाज़ी की। अलग-अलग प्रवक्तों ने धरने के दौरान केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा पास किए खेती आर्डीनैंस बिल को 'किसान मारू' और 'पंजाब मारू' करार दिया। इस धरने में आए लोगों को संबंधित करते निमिशा मेहता ने कहा कि किसान मारू बिल के पास करवाने का यदि अकाली दल सचमुच विरोध करता है तो गठबंधन तोड़ चुका होता लेकिन इस गठबंधन को न तोड़ना इस बात का सबूत हैं कि अकाली दल ने खुद साथ होकर भाजपा से किसानों के हकों का कत्ल करवाया।

निमिशा ने कहा कि बीबी बादल का केंद्रीय कैबिनेट में से इस्तीफ़ा केवल एक राजनीतिक स्टंट हैं। यदि बीबी बादल इस बात के विरोधी होते तो संसद में ज़ोर -शोर के साथ इसका विरोध करते लेकिन बीबी बादल तो इन बिलों के खिलाफ संसद में कुछ भी नहीं बोली। और तो और बीबी बादल की तरफ से इन आर्डीनैंस से संबंधित जारी किए गए वीडियो इस बात का सबूत हैं कि बीबी बादल इस कानून के खिलाफ नहीं क्योंकि उन्होंने अपने हर वीडियो में इस कानून को किसान विरोधी नहीं बताया बल्कि यह कहा कि यह कानून पंजाब के किसानों को समझ नहीं आया। 

निमिशा ने कहा कि यदि अकाली दल किसानों का हिमायती होता तो अब तक भाजपा नेताओं के घरों को घेराव कर रहा होता लेकिन इसके उल्ट इन की लीडरशिप और विशेष तौर पर बीबी बादल इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि किसानों को यह कानून समझ नहीं आया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके वर्कर इस किसान मारू कानून के विरोध में हर संघर्ष करेंगे और किसानों के हकों के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं। इस मौके पर उनके साथ ब्लाक प्रधान मास्टर श्रवण राम, आर.पी. सोनी, अमनदीप बैंस, धर्मेंद्र सहोता, दलविन्दर मेघोवाल, पाली जस्सोवाल, सुखविन्दर दद्याल, विक्की जोशी शैला, पीटा बिलड़ो, चौधरी करमचन्द, हरमन्दर सिंह, संघा लंघेरी, रणजीत डघाम, रेशम चक्कपुरू, रणवीर पालदीप, सुच्चा सिंह कुक्कड़मजारा, कश्मीर सिंह रुड़कीखास, महिंद्र पुरखोवाल, देव हाजीपुर, अजमेर राणा मलकोवाल, जोगिन्द्र गद्दीवाल, दीपा महरा, फ़ौजी बिरमपुर, सोहण सिंह बीड़ा और अन्य  कांग्रेसी वर्करों सहित किसान बड़ी संख्या में उपस्थित थे। 

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