नकोदर पोस्ट ऑफिस में करोड़ों की हेराफेरी, 8 साल ED की जांच के बाद पूर्व सब पोस्टमार्टर को सख्त सजा

Edited By Kamini,Updated: 22 Sep, 2026 09:16 AM

nakodar post office fraud

जालंधर ED ने करीब 8 साल तक चली जांच के बाद नकोदर के पूर्व सब पोस्टमास्टर संजीव कुमार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोषी पाया है।

नकोदर (पाली): दक्षिणी गेट, नकोदर स्थित सब-पोस्ट ऑफिस के तत्कालीन सब-पोस्ट मास्टर संजीव कुमार को सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एस.ए.एस. नगर (मोहाली) की विशेष पी.एम.एल.ए. अदालत ने दोषी करार देते हुए डेढ़ साल की कैद और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उसे 3 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार विशेष अदालत ने यह फैसला 14 सितम्बर 2026 को सुनाया। अदालत ने संजीव कुमार को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पी.एम.एल.ए.) 2002 की धारा 3 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए धारा 4 के तहत दोषी ठहराया। ED द्वारा जांच सी.बी.आई. की ओर से दर्ज एफ.आई.आर. नंबर आर.सी.सी.एच.जी. 2018ए 004, 1 फरवरी 2018 के आधार पर शुरू की गई थी। एफ.आई.आर. में संजीव कुमार तथा अन्य आरोपियों के खिलाफ दक्षिणी गेट सब-पोस्ट ऑफिस, नकोदर में धोखाधड़ी, सरकारी धन और पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे।

ED की जांच के अनुसार संजीव कुमार ने कथित तौर पर 54 फर्जी बचत खाते खोले, जिससे सरकारी खजाने को 3.40 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इसके अलावा 41 बचत खातों की एंट्रियों में हेराफेरी कर 2.79 करोड़ रुपए तथा 51 आर.डी. खातों में हेराफेरी कर 1.89 करोड़ रुपए की हेराफेरी की थी। इसके अलावा पी.पी.एफ., टर्म डिपॉजिट सहित ग्राहकों के अन्य खातों में भी कथित तौर पर हेराफेरी की गई। जांच एजैंसी ने इस केस में कुल 8.48 करोड़ रुपए के सरकारी फंड में कथित तौर पर धोखाधड़ी पाई गई थी। ईडी के मुताबिक यह राशि नकद तथा संजीव कुमार और उसके सहयोगियों द्वारा संचालित कई बैंक खातों के माध्यम से निकाली गई। जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि अपराध से प्राप्त धन का इस्तेमाल आलीशान जीवनशैली, जुए, निजी खर्चों और अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया।

जांच के दौरान ईडी ने करीब 42 लाख रुपए मूल्य की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की थीं। इस संबंध में 2 मार्च 2025 को प्रोविजनल अटैचमैंट ऑर्डर नंबर 04/2025 जारी किया गया था, जिसकी 20 अगस्त 2025 को पुष्टि की गई।

प्ली-बर्गेनिंग के जरिए मामले का निपटारा

मुकदमे की सुनवाई के दौरान संजीव कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बी.एन.एस.एस.), 2023 के प्रावधानों के तहत प्ली-बर्गेनिंग के माध्यम से मामले का निपटारा करने की मांग की। अदालत ने उसकी अर्जी स्वीकार करते हुए पी.एम.एल.ए. की धारा 3 के तहत अपराध के लिए धारा 4 के अंतर्गत सजा सुनाई। अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी से वसूल की गई राशि सुपरिंटैंडैंट ऑफ पोस्ट ऑफिस, कपूरथला डिवीजन के कार्यालय को दी जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि पीड़ित पी.एम.एल.ए. के तहत अटैच संपत्ति की बहाली के लिए आवेदन दायर करने का हकदार होगा।

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