रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप: ED की रडार पर मोहाली-चंडीगढ़ के एक दर्जन से ज्यादा बिल्डर व डवेलपर

Edited By Kamini,Updated: 07 May, 2026 04:36 PM

mohali chandigarh builders and developers on ed radar

ईडी द्वारा वीरवार को मोहाली-चंडीगढ़ में विभिन्न जगह पर की गई कार्रवाई को लेकर रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मच गया है।

लुधियाना (हितेश): ईडी द्वारा वीरवार को मोहाली-चंडीगढ़ में विभिन्न जगह पर की गई कार्रवाई को लेकर रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस कार्रवाई के दौरान मोहाली-चंडीगढ़ के एक दर्जन से ज्यादा बिल्डर व डवेलपर ईडी के रडार पर आ गए है।

यह मामला सी एल यू फ्रॉड से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जिसमें मोहाली-चंडीगढ़ के दो प्रमुख बिल्डर व डिवेलपर द्वारा कुछ समय पहले मेगा प्रोजेक्ट की मंजुरी ली गई थी, लेकिन उनके पास उस समय दिखाई गई पूरी जमीन की रजिस्ट्री नहीं थी। इसका खुलासा कई जमीन मालिकों द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत में हुआ।

जानकारी के मुताबिक उक्त बिल्डर व डिवेलपर द्वारा उनके नाम पर फर्जी तरीके से सहमति देकर सी एल यू की मंजुरी ली गई है। इस संबंध में उक्त बिल्डर व डिवेलपर के खिलाफ दर्ज केस को ईडी की कार्रवाई का नतीजा माना जा रहा है, जिसके तहत उन बिल्डर व डवेलपर को भी जांच के दायरे में लाया गया है, जिन्होंने मेगा प्रोजेक्ट में जमीन खरीदी हुई है। इन सब लोगों की बैंक डिटेल के अलावा प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त के दस्तावेजों के आधार पर आने वाले दिनों में रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े और लोगो पर भी ईडी का शिकंजा कस सकता है

गमाडा के अधिकारियों के होश उड़े, फोन बंद करके हुए गायब

ईडी द्वारा मोहाली-चंडीगढ़ के बिल्डर व डवेलपर पर की गई कार्रवाई से गमाडा के अधिकारियों के होश उड़े गए हैं। सूत्रों के अनुसार इनमें से कई ऑफिसर फोन बंद करके गायब हो गए हैं, क्योंकि यह मामला उक्त बिल्डर व डिवेलपर के मेगा प्रोजेक्ट के सी एल यू फ्रॉड से जुड़ा हुआ है, जिसे इनमें से कुछ अधिकारियों द्वारा गलत तरीके से मंजुरी दी गई थी। बताया जा रहा है कि पूरी रजिस्ट्री न होने की वजह से विवाद में आए सी एल यू को अब ठीक करने की कोशिश की जा रही थी, जिसके लिए हाल ही में एक बड़े ऑफिसर की नियुक्ति करने की चर्चा हो रही है। इसमें बड़े नेताओं के करीबी की भी भूमिका सामने आई है, जिनमें से एक के फ्लैट पर हुई छापेमारी में भारी मात्रा में कैश की रिकवरी हुई है। इसे लेकर विपक्ष के नेताओं द्वारा सवाल खड़े किए जा रहे हैं जिसके मद्देनजर आने वाले समय में गमाड़ा के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है 

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