Edited By Kalash,Updated: 17 May, 2022 11:31 AM

ताजपुर रोड की सेंट्रल जेल मे मोबाइलों की रिकवरी के जो आंकडे निकलकर सामने आ रहे है वह राज्य सरकार व जेल प्रशासन के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन सकते है क्योंकि
लुधियाना (स्याल): ताजपुर रोड की सेंट्रल जेल मे मोबाइलों की रिकवरी के जो आंकडे निकलकर सामने आ रहे है वह राज्य सरकार व जेल प्रशासन के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन सकते है क्योंकि पिछले कई 31 दिनों में 75 मोबाइल जेल प्रशासन की पकड़ में आए है जबकि दर्जनों मोबाइलजेल के अंदर चलने की अशंका जताई जा रही है। इसी कड़ी के अंर्तगत सेंट्रल जेल में चलाए गए सर्च अभियान के तहत 5 बंदियों सहित 15 मोबाइल बरामद हुए है। पुलिस ने सहायक सुपरिटेंडेंट सतनाम सिंह की शिकायत पर आरोपी बंदियों के खिलाफ प्रिजन एक्ट की धारा के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी बंदियो की पहचान संदीप सिंह, नवदीप कुमार, मो.जाहिद, गुरसेवक सिंह, मनिंदर सिंह के तौर पर हुई है।
जेल के किस खुफिया रास्ते से पहुंच रहे बंदियों के पास मोबाइल
सेंट्रल जेल में बंदियो तक मोबाइल किस खुफिया रास्ते से पहुंचाए जा रहे है यहां पर भी सवाल उठता है। क्योंकि बंदी चारदीवारी के भीतर से मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से जेल के बाहर अपराधिक गतिविधियों की घटनाओं को अंजाम देते है। जिसके खुलासे पुलिस द्वारा नामजद किए गए आरोपियों द्वारा भी कई बार किए जा चुके है। लेकिन जेल प्रशासन आज तक इस नतीजे तक नहीं पहुंच पाया कि मोबाइल जेल में बंदियों को कौन उपलब्ध करवाता है?
अक्सर अधिकारियों का एक ही जबाव होता है कि मोबाइल फैंके जा रहे है। जबकि इस मामलों में जेल अधिकारियों को स्टाफ की जिम्मेवारी भी तय करनी बनती है। बता दें कि जेल के अंदर फैंके जाने वाले मोबाइलों का दृश्य क्या आज तक वहां लगे सी.सी.टी.वी. कैमरों में कैद क्यों नहीं हो सका यह भी सुरक्षा की कार्यप्रणाली पर सवालियां निशान है।
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