निगम कमिश्नर कार्यालय हुआ हाईटेक: अब 1 घंटे में अधिकारी तक पहुंचेगी शिकायत, पढ़ें...

Edited By Vatika,Updated: 24 Sep, 2026 08:33 AM

ludhiana municipal corporation

नगर निगम कमिश्नर कार्यालय अब पूरी तरह से आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस

लुधियाना (राज): नगर निगम कमिश्नर कार्यालय अब पूरी तरह से आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस होने जा रहा है। शहरवासियों की समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए नगर निगम ने अपना आंतरिक डिजिटल प्लेटफॉर्म 'सूचित नगर निगम' तैयार कर लिया है। इस अत्याधुनिक सिस्टम का सबसे बड़ा लाभ महानगर के आम नागरिकों को मिलेगा। अब अपनी लिखित शिकायतों या ईमेल पर कार्रवाई के लिए उन्हें दफ्तरों के हफ्तों चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि शिकायत दर्ज होते ही महज एक घंटे के भीतर वह सीधे संबंधित फील्ड अधिकारी तक पहुंच जाएगी। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का सफल ट्रायल चल रहा है और अगले सप्ताह इसे विधिवत लांच कर दिया जाएगा।

कर्मचारी करेगा स्कैन, AI तकनीक तुरंत वर्ड फाइल में बदलेगी शिकायत
मौजूदा व्यवस्था में ज्यादातर लोग अपनी शिकायतें लिखित रूप में देते हैं ताकि उनके पास पावती रहे। इसके बाद फाइल कमिश्नर से साइन होकर बाबू और फिर फील्ड अधिकारी तक पहुंचने में कई दिन लग जाते थे। नई प्रणाली के तहत जैसे ही कमिश्नर कार्यालय में कोई लिखित शिकायत आएगी, वहां तैनात कर्मचारी उसे तुरंत हाई-स्पीड स्कैनर से स्कैन करेगा। स्कैन होते ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल उसे स्वचालित रूप से टेक्स्ट (Word File) में बदल देगा। सॉफ्टवेयर विषय और इलाके के आधार पर संबंधित अधिकारी का चयन कर लेगा। इसके बाद सिस्टम से दो डिजिटल फाइलें बनेंगी, पहली फाइल सीधे संबंधित विभाग के संबंधित फील्ड अधिकारी के पास भेजी जाएगी। दूसरी फाइल निगम के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) को भेजी जाएगी, जहां से अधिकारी शिकायत के निवारण के बाद सीधे शिकायतकर्ता से फोन पर फीडबैक लेंगे। इसी तरह ईमेल से आने वाली शिकायतों को भी इसी एकीकृत व्यवस्था से जोड़कर संबंधित विंग को डिस्पैच किया जाएगा।

समाधान के बाद फोटो सहित फीडबैक अनिवार्य, तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही
इस नई प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि शिकायत का निस्तारण करने वाले अधिकारी को मौके की फोटो सहित अपनी एक्शन-टेकन रिपोर्ट सिस्टम में अपलोड करनी होगी। अब केवल कागजों पर शिकायत का समाधान दिखाकर पल्ला झाड़ना संभव नहीं होगा। निगम कमिश्नर किसी भी समय अपने डैशबोर्ड पर यह देख सकेंगे कि किस शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई है। शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बाद ही केस को सिस्टम में क्लोज माना जाएगा।

'रेड जोन' में दिखेंगे सुस्त वार्ड, परफॉर्मेंस से तय होंगे तबादले
इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से निगम अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता का सटीक आंकलन हो सकेगा।कमिश्नर की स्क्रीन पर शहर के तमाम वार्डों का लाइव डेटा उपलब्ध रहेगा। जिस वार्ड में सबसे ज्यादा शिकायतें पेंडिंग होंगी, वह वार्ड स्क्रीन पर सीधे 'रेड कलर' में हाइलाइट होगा। कमिश्नर एक क्लिक पर देख सकेंगे कि किस अधिकारी को कितनी शिकायतें भेजी गईं और उसने समय पर कितनों का हल निकाला। अधिकारियों के काम के इसी रिकॉर्ड और परफॉर्मेंस के आधार पर उनकी एसीआर (ACR) तय होगी और भविष्य के तबादले व जिम्मेदारियां निर्धारित की जाएंगी।

ट्रायल सफल, दूसरे फेज में जनता को मिलेगी लाइव ट्रैकिंग: कमिश्नर ओजस्वी अलंकार
निगम कमिश्नर ओजस्वी अलंकार ने बताया कि 'सूचित नगर निगम' एक अत्याधुनिक आंतरिक प्रशासनिक सिस्टम है, जिसका मुख्य उद्देश्य जनता की समस्याओं को बिना किसी मानवीय देरी के संबंधित अधिकारी तक पहुंचाना और उस पर तत्काल एक्शन लेना है। कमिश्नर ने कहा कि इस सिस्टम का ट्रायल रन पूरी तरह सफल रहा है और इसे आगामी सप्ताह में पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट के दूसरे फेज में शहरवासियों के लिए 'लाइव ट्रैकिंग सिस्टम' भी शुरू किया जाएगा, जिससे नागरिक घर बैठे अपने मोबाइल से देख सकेंगे कि उनकी शिकायत किस अधिकारी के पास है और उस पर क्या प्रगति हुई है। इससे न केवल लोगों के कीमती समय की बचत होगी, बल्कि नगर निगम के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

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