तेजधार हथियारों के दम पर बाइक लूटी, 31 दिन बाद अब पुलिस ने दर्ज किया चोरी का पर्चा!

Edited By Kalash,Updated: 18 May, 2026 10:39 AM

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एक गरीब युवक को अपनी लूटी हुई बाइक का केस दर्ज करवाने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं।

लुधियाना (राज): यहां एक गरीब युवक को अपनी लूटी हुई बाइक का केस दर्ज करवाने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं। पीड़ित ने इंसाफ के लिए पुलिस कमिश्नर दफ्तर से लेकर थाने तक के 18 चक्कर काटे, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो आखिरकार उसने रोते हुए थाने के भीतर ही धरना दे दिया। भारी ड्रामे के बाद पूरे एक महीने बाद पुलिस ने केस तो दर्ज किया, लेकिन खेल ऐसा खेला कि सरेराह हुई 'लूट' की वारदात को कागजों में महज 'चोरी' बनाकर रख दिया।

यह दर्दनाक दास्तां रेपिडो बाइक चलाने वाले हुकम चंद मौर्य की है। पीड़ित के मुताबिक बीती 15 अप्रैल की रात करीब 10:30 बजे जब वह सहज एंक्लेव कॉलोनी के पास पहुंचे, तो पीछे से एक बाइक पर आए दो बदमाशों ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही हुकम चंद सड़क पर गिर गए, जिसके बाद दोनों बेरहम लुटेरों ने उन्हें लात-घूंसों और तेजसे पीटना शुरू कर दिया। जान बचाने के लिए पीड़ित भागकर झाड़ियों में छिप गया और आरोपी उनकी बाइक लूटकर रफूचक्कर हो गए। वारदात के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने अगले दिन सुबह थाना मेहरबान में शिकायत देने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।

अगले दिन जब पीड़ित थाने पहुंचा, तो पुलिस ने सिर्फ एक कच्ची शिकायत लिखकर उसे टरका दिया। इसके बाद पीड़ित लगातार 5 दिनों तक थाने की चौखट पर सिर पटकता रहा, लेकिन न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही पुलिस ने मौके पर जाकर सीसीटीवी कैमरे खंगालने की जहमत उठाई। परेशान होकर पीड़ित ने पुलिस कमिश्नर (CP) दफ्तर में गुहार लगाई, जहां से फाइल एसीपी ईस्ट के पास पहुंची। एसीपी ने भी थाना मेहरबान को मामला दर्ज करने के आदेश दिए, लेकिन थानेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा तमाचा तब लगा, जब 24 अप्रैल की रात पीड़ित के मोबाइल पर एक मैसेज आया। मैसेज देखकर पीड़ित के होश उड़ गए, क्योंकि यह उसकी उसी लूटी हुई बाइक का चालान था, जिसे थाना मेहरबान की पुलिस ने ही काटा था। पीड़ित ने तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी कि लुटेरे उसकी बाइक लेकर खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस चालान काट रही है, लेकिन फिर भी कातिल गिरफ्त से दूर रहे और केस दर्ज नहीं हुआ।

आखिरकार थक-हारकर 16 मई को पीड़ित हुकम चंद रोते हुए थाना मेहरबान पहुंचे और थाने के अंदर ही धरने पर बैठ गए। पीड़ित का रो-रोकर बुरा हाल था और वह इंसाफ की भीख मांग रहा था। थाने के भीतर धरना शुरू होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में केस तो दर्ज किया गया, लेकिन जब एफआईआर की कॉपी सामने आई तो पीड़ित दंग रह गया। पुलिस ने बदमाशों पर डकैती या लूट की धारा लगाने की बजाय भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) के तहत मामूली चोरी का मुकदमा दर्ज कर लिया। जब इस पूरे मामले पर जांच अधिकारी अवतार सिंह से तीखे सवाल पूछे गए, तो उन्होंने अजीबोगरीब सफाई देते हुए सारा ठीकरा पीड़ित पर ही फोड़ दिया। जांच अधिकारी का कहना था कि पीड़ित खुद उनके पास देरी से पहुंचा था। वहीं, लूट की गंभीर धाराएं न लगाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि युवक के साथ लूट हुई थी, अगर आगे जांच में लूट की बात साबित होती है, तो धाराएं बढ़ा दी जाएंगी। अब सवाल यह उठता है कि अगर पुलिस की नाक के नीचे आम जनता को इंसाफ के लिए रो-रोकर थानों में धरने देने पड़ेंगे, तो सूबे में कानून का राज कैसे चलेगा?

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