Edited By Urmila,Updated: 21 Jul, 2026 11:56 AM
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने गुरुद्वारा गुरु नानक गरीब निवाज हयेज लंदन में अफगानिस्तान की सिख संगत द्वारा श्री गुरु हरकिशन साहिब जी के प्रकाश गुरुपर्व को समर्पित 27वें बाला प्रीतम गुरमत समागम में भाग लिया।
पंजाब डेस्क/लंदन : श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने गुरुद्वारा गुरु नानक गरीब निवाज हयेज लंदन में अफगानिस्तान की सिख संगत द्वारा श्री गुरु हरकिशन साहिब जी के प्रकाश गुरुपर्व को समर्पित 27वें बाला प्रीतम गुरमत समागम में भाग लिया। यह कार्यक्रम अफगानिस्तान और UK की सिख संगत-निहकामी सेवा ट्रस्ट यूके, गुरु हरगोबिंद साहिब ट्रस्ट यूके, गुरुद्वारा गुरु नानक गरीब निवाज ने मिलकर आयोजित किया था। इस दौरान बड़ी संख्या में संगत ने कार्यक्रम में भाग लिया।
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी जहां भी गए, वहां संगत थी। उन्होंने सिखों को गुरबानी से जोड़ा। आज भी सिख श्री गुरु ग्रंथ साहिब और गुरुद्वारा साहिब के ज़रिए गुरबानी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि जैसे विदेशों में सिख हर हफ़्ते गुरुद्वारों में समागम और एकत्रता करके संगत करते हैं, वैसे ही इसे हमेशा बनाए रखना चाहिए ताकि उनकी नई पीढ़ी सिख धर्म से जुड़ी रहे। उन्होंने कहा कि बच्चों को गुरमत से जोड़े रखना बहुत ज़रूरी है। जत्थेदार गड़गज ने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी का सिख धर्म बहुत सीधा, खुला और सरल है, जिसमें कोई कट्टरता या छुआछूत नहीं है, यह पूरी इंसानियत को अपनाता है।
उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि सिख बच्चे और बच्चियों के जो ग्रुप गुरुद्वारा जन्म स्थान श्री ननकाना साहिब में श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाशोत्सव के मौके पर गुरबानी कीर्तन करते हैं, वेस्ट पंजाब के उन बच्चों के ग्रुप को विदेशों में ऐसे आयोजनों के लिए खास तौर पर बुलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरबानी कीर्तन राग के आधार पर आराम से किया जाना चाहिए, और कान रस नहीं लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि कीर्तनी जत्थों को गुरमत संगीत प्रणाली से बाहर नहीं जाना चाहिए। जत्थेदार गड़गज ने निहाकामी सेवा ट्रस्ट यूके के लीडर भाई गजिंदर सिंह की कोशिशों की तारीफ की और संगत से उनका साथ देने को कहा।
यूके में पिछले दिनों हुई एक घटना के बारे में जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि गुरु ने सिखों को सशस्त्र दिए हैं, यह उनके ऊपर गुरु का आशीर्वाद है। उन्होंने कहा कि सिख हथियारों का गलत इस्तेमाल नहीं करते और गुरु के अनुशासन में रहते हैं। सिख का हथियार दबे-कुचले लोगों की सुरक्षा और आत्मरक्षा के लिए होता है, यह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता। उन्होंने कहा कि सिखों का यह फर्ज है कि वे जिस देश में रह रहे हैं, उसके प्रति वफादार रहें और उसकी तरक्की में योगदान दें। उन्होंने कहा कि सिखों को उस देश के कोड ऑफ लॉ के अंदर काम करना चाहिए जिसमें वे रह रहे हैं। सिख हमेशा ज़ुल्म और अत्याचार के खिलाफ लड़ते हैं लेकिन किसी के साथ धक्का नहीं देते। उन्होंने संगत से समाज सेवा और इंसानियत की भलाई करने को कहा।
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि हर सिख परिवार को अपने बच्चों के नाम में सिंह और कौर जरूर जोड़ना चाहिए, यह उनके एक परिवार और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की दी हुई खास पहचान की निशानी है। वह एक ही परिवार हैं और दुख-सुख के साथी हैं, इसलिए एक-दूसरे की मदद करनी होगी। उन्होंने कहा कि सिखों को अपने बच्चों का नाम चढ़दी कला वाले रखें। आजकल नाम के बाद गोत्र जोड़ने का ट्रेंड है, नामों से सिंह और कौर को हटाया जा रहा है, यह सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि सिख कपल्स को तीन से चार बच्चे पैदा करने ही होंगे, यह उनके लिए सामाजिक और राष्ट्रीय तौर पर बहुत ज़रूरी है। गुरु ने उन्हें कामगार बनाया है, इसलिए उन्हें इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि अगर उनके ज्यादा बच्चे हुए तो उनकी परवरिश और पढ़ाई-लिखाई कैसे होगी, उन्हें गुरु पर भरोसा रखना चाहिए।
जत्थेदार गड़गज ने कहा कि यूके में सिख लड़कियों को बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले भी सामने आ रहे हैं, जिनसे पूरी तरह सावधान रहना होगा और अपने बच्चों को सिख धर्म और गुरु घर से जोड़े रखना होगा। सिख कोड ऑफ़ कंडक्ट में लिखा है कि एक सिख लड़की की शादी सिर्फ सिख लड़के से ही हो सकती है, उन्हें अपने बच्चों के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताना चाहिए और उनकी प्रॉब्लम जाननी चाहिए और उनसे लगातार बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सिख माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को घर में सिख माहौल दें ताकि यह बाड़ बच्चों की रक्षा करे।
उन्होंने संगत को सभी समुदायों और देशों को गले लगाने, किसी से नफरत या जलन न करने का संदेश भी दिया। उन्होंने विदेश में रहने वाली संगत को श्री ननकाना साहिब, श्री दरबार साहिब, पंज तख्त साहिब और श्री फतेहगढ़ साहिब में दर्शन के लिए जरूर आने का न्योता दिया।
उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिखों का सबसे ऊंचा तख्त है, जिसके आगे कोई भी शासक टिक नहीं सकता। उन्होंने संगत को श्री अकाल तख्त साहिब से जुड़े रहने का संदेश भी दिया। इस अवसर पर भाई गजिंदर सिंह खालसा, श्री अकाल तख्त साहिब के अतिरिक्त ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह, सिख विद्वान भाई गुरबख्श सिंह गुलशन, नानकसर बड़ूंदी से बाबा अमर सिंह जी, वरिंदर सिंह, हरप्रीत सिंह, अशपाल सिंह, हरिंदर सिंह, गुरिंदर सिंह, मनजीत सिंह, लोच सिंह, अमरजीत सिंह, चरण सिंह, सुखदीप सिंह रंधावा, अजीत सिंह, निजी सहायक बलदेव सिंह, मीडिया सलाहकार जसकरन सिंह आदि उपस्थित थे।
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