जालंधर में महीनों से बंद पड़े हैं ट्रैफिक सिग्नल, आम जनता पर पड़ रहा सीधा असर

Edited By Urmila,Updated: 19 Jan, 2026 10:30 AM

jalandhar s traffic is in a terrible state

जालंधर शहर का ट्रैफिक सिस्टम लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। जहां एक ओर ट्रैफिक पुलिस द्वारा सी.सी.टी.वी. कैमरों के जरिए चालान प्रक्रिया को सख्ती से लागू किया जा रहा है।

जालंधर (खुराना) : जालंधर शहर का ट्रैफिक सिस्टम लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। जहां एक ओर ट्रैफिक पुलिस द्वारा सी.सी.टी.वी. कैमरों के जरिए चालान प्रक्रिया को सख्ती से लागू किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम की घोर लापरवाही के कारण शहर की अधिकांश ट्रैफिक लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं। इसका सीधा असर शहरवासियों की रोजमर्रा की आवाजाही पर पड़ रहा है और प्रमुख सड़कों पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।

हाल ही में डी.जी.पी. के निर्देशों पर शहर में एक हजार से अधिक सी.सी.टी.वी. कैमरे एक्टिव किए गए हैं, जिससे ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तुरंत कार्रवाई हो रही है। लेकिन विडंबना यह है कि जिन स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल ही काम नहीं कर रहे, वहां भी चालान काटे जा रहे हैं। इस विरोधाभासी स्थिति को लेकर आम लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

जानकारी के अनुसार ट्रैफिक लाइटों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम के अधीन है, जिसे मोहाली की एक निजी कंपनी को आऊटसोर्स किया गया है। निगम द्वारा संबंधित कंपनी को नियमित भुगतान किया जा रहा है, इसके बावजूद न तो सिग्नलों की मरम्मत करवाई जा रही है और न ही उन्हें सही करने को लेकर कोई ठोस पहल नजर आ रही है।

शहर के गुरु नानक मिशन चौक, डॉ. अंबेडकर चौक, चिक-चिक चौक, वर्कशॉप चौक, कपूरथला चौक सहित कई प्रमुख और व्यस्त चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल बंद पड़े हैं। इन चौराहों पर हर समय वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, मरीजों और व्यापारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सिग्नल ही बंद हैं तो ट्रैफिक नियमों के पालन की जिम्मेदारी पूरी तरह नागरिकों पर थोपना गलत है। दूसरी ओर ट्रैफिक पुलिस भी निगम की इस लापरवाही से खासा परेशान है, क्योंकि सिग्नल बंद होने के कारण सड़क पर अव्यवस्था फैलती है और जनता का गुस्सा ट्रैफिक कर्मचारियों को झेलना पड़ता है।

शहरवासियों का आरोप है कि निगम के अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि रोजाना इन्हीं खराब सिग्नलों से होकर गुजरते हैं, लेकिन इसके बावजूद इन्हें दुरुस्त करवाने के लिए कोई ठोस दबाव संबंधित विभाग या निजी कंपनी पर नहीं बनाया जा रहा। इससे यह साफ झलकता है कि अफसरशाही इन गंभीर मुद्दों को लेकर पूरी तरह उदासीन बनी हुई है।

पूरा मामला कई बार मेयर वनीत धीर के संज्ञान में भी लाया जा चुका है। मेयर द्वारा निगम अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मोहाली की संबंधित कंपनी को तलब कर जवाबदेह बनाया जाए। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि कंपनी अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाती है, तो उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर मेयर के आदेशों का पालन होता नजर नहीं आ रहा।

फिलहाल शहरवासी नगर निगम से जल्द ठोस और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ट्रैफिक सिग्नलों को ठीक नहीं किया गया, तो लगातार बिगड़ती यातायात व्यवस्था लोगों की परेशानी को और बढ़ा सकती है ।

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