तरनतारन का शिक्षा विभाग कार्यकारी अधिकारियों के सहारे, दूसरे जिलों से सौंपा प्रभार

Edited By Kamini,Updated: 24 Oct, 2026 12:42 PM

education department of tarn taran

पंजाब सरकार द्वारा राज्य की शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाने के किए जा रहे दावों के बीच तरनतारन जिले में शिक्षा विभाग के महत्वपूर्ण पद स्थायी अधिकारियों के बिना खाली होने का मामला सामने आया है।

अमृतसर (दलजीत):  पंजाब सरकार द्वारा राज्य की शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाने के किए जा रहे दावों के बीच तरनतारन जिले में शिक्षा विभाग के महत्वपूर्ण पद स्थायी अधिकारियों के बिना खाली होने का मामला सामने आया है। स्थिति यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी) और जिला शिक्षा अधिकारी (एलिमेंट्री) के पदों का काम अब दूसरे जिलों के अधिकारियों को कार्यवाहक (अतिरिक्त प्रभार) के रूप में सौंपकर चलाया जा रहा है।

शिक्षा विभाग द्वारा देर शाम जारी पत्र के अनुसार, तरनतारन के जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी) का अतिरिक्त प्रभार गुरदासपुर के संबंधित अधिकारी राजेश शर्मा को, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी (एलिमेंट्री) का अतिरिक्त प्रभार अमृतसर के संबंधित अधिकारी कंवलजीत सिंह को सौंपा गया है। इस तरह जिले की शिक्षा प्रणाली के दो महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद अब अपने स्थायी अधिकारियों के बजाय कार्यवाहक अधिकारियों के सहारे चल रहे हैं।

दोनों पदों पर स्थायी नियुक्ति क्यों नहीं?

पंजाब कांग्रेस कमेटी के सदस्य और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजकंवरप्रीत सिंह लक्की ने कहा कि बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि यदि सरकार द्वारा शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, तो जिला स्तर पर शिक्षा विभाग के मुख्य पदों पर स्थायी अधिकारी क्यों नहीं तैनात किए जा रहे? तरनतारन जैसे सीमावर्ती जिले में स्कूली शिक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की सीधी निगरानी करने वाले दो अहम पदों का अतिरिक्त प्रभार के जरिए चलना विभागीय व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करता है।

अमृतसर और गुरदासपुर के अधिकारियों पर बढ़ा अतिरिक्त बोझ

दूसरे जिलों के अधिकारियों को तरनतारन का अतिरिक्त प्रभार देने से उनकी अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ एक और जिले की प्रशासनिक जिम्मेदारी भी जुड़ गई है। इससे एक ही अधिकारी को एक ही समय में अपने जिले के कामकाज के साथ-साथ तरनतारन के स्कूलों और विभागीय मामलों की निगरानी करनी पड़ेगी। इस व्यवस्था को लंबे समय तक जारी रखने के बजाय खाली पदों पर स्थायी नियुक्तियों की जरूरत महसूस की जा रही है।

'शिक्षा क्रांति' के दावों के बीच जमीनी तस्वीर अलग

राजकंवरप्रीत सिंह लक्की ने कहा कि सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों की नुहार बदलने, शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन तरनतारन में शिक्षा विभाग के मुख्य प्रशासनिक पद ही स्थायी अधिकारियों से खाली होने के कारण कार्यवाहक अधिकारियों के जरिए चलाए जाना सरकार के इन दावों की जमीनी हकीकत को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

विभागीय पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दोनों अधिकारी अगले आदेशों तक अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। इस अतिरिक्त प्रभार के लिए किसी अलग वित्तीय लाभ का प्रावधान नहीं किया गया है। अब सवाल यह है कि यह अस्थायी व्यवस्था कितने समय तक जारी रहेगी और तरनतारन जिले को अपने स्थायी जिला शिक्षा अधिकारी कब मिलेंगे। तरनतारन के शिक्षा विभाग में पैदा हुई यह स्थिति न केवल प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बनी है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार के बड़े-बड़े दावों पर भी सवाल खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि सरकार कार्यवाहक अधिकारियों के सहारे चल रही इस व्यवस्था को कब खत्म करके दोनों अहम पदों पर स्थायी अधिकारियों की तैनाती करती है।

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