वायु प्रदूषण के प्रकोप से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने की तैयारी, खुलेंगे विशेष क्लीनिक

Edited By Kalash,Updated: 10 Oct, 2026 12:04 PM

health department clinic

वायु प्रदूषण के कारण सांस और छाती से संबंधित बीमारियों के बढ़ते मामलों के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की समय पर पहचान और इलाज के लिए विशेष छाती रोग क्लीनिक शुरू करने की तैयारियां तेज कर दी हैं।

अमृतसर (दलजीत): वायु प्रदूषण के कारण सांस और छाती से संबंधित बीमारियों के बढ़ते मामलों के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की समय पर पहचान और इलाज के लिए विशेष छाती रोग क्लीनिक शुरू करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार भलाई मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार अमृतसर के जिला स्तरीय अस्पताल और मैडीकल कॉलेज के अधीन चल रहे सरकारी टी.बी. अस्पताल में यह क्लीनिक चलाए जाएंगे। विभाग द्वारा आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं और 12 अक्तूबर से मरीजों को इन क्लीनिकों का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

जानकारी के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार भलाई मंत्रालय के अपर सचिव डा. राकेश गुप्ता द्वारा जारी पत्र में वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण पैदा होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के माध्यम से चलाए जा रहे राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत यह पहल की गई है।

योजना के तहत हर साल सितम्बर से फरवरी तक छाती रोग क्लीनिक चलाने का प्रावधान किया गया है। इस अवधि के दौरान हवा की गुणवत्ता खराब होने और प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण सांस की समस्याओं वाले मरीजों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्लीनिकों का मुख्य उद्देश्य ऐसे मरीजों की समय पर जांच, बीमारी की पहचान, इलाज और मैडीकल सलाह उपलब्ध करवाना है। इन क्लीनिकों में हर आयु वर्ग के मरीजों की जांच की जाएगी। सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, छाती में जकड़न/तकलीफ और सांस से संबंधित अन्य लक्षणों वाले मरीजों का मैडीकल आवश्यकतानुसार परीक्षण और इलाज किया जाएगा। हालांकि किसी भी बीमारी की पुष्टि मैडीकल जांच के बाद ही की जाएगी।

कर्मचारी और उपकरण भी होंगे महत्वपूर्ण 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को क्लीनिकों के सुचारू संचालन के लिए मौजूदा स्वास्थ्य संसाधनों का उपयोग करते हुए आवश्यक व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत क्लीनिक के लिए उपयुक्त स्थान, संबंधित कर्मचारियों की तैनाती, सूचना बोर्ड, आवश्यक उपकरण, दवाइयां और अन्य सामग्री का प्रबंध करना होगा। इसके अलावा विशेषज्ञ डॉक्टरों, मैडीकल अधिकारियों, स्टाफ नर्सों, काऊंसलरों और डेटा एंट्री आप्रेटरों को आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण देने का प्रावधान भी किया गया है। प्रत्येक कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी ताकि मरीज की जांच से लेकर इलाज और रिकॉर्ड रखने तक की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके।

टी.बी. के मरीजों की पहचान और इलाज के लिए भी होगा ताल-मेल 

छाती रोग क्लीनिकों को टी.बी. इकाइयों, नशामुक्ति/तंबाकू छुड़ाव केंद्रों और गैर-संचारी रोग क्लीनिकों से जोड़ने की योजना भी केंद्रीय निर्देशों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी मरीज को छाती की बीमारी के साथ किसी अन्य स्वास्थ्य सेवा की आवश्यकता हो तो उसे सही केंद्र तक पहुंचाया जा सके। लगातार खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण कई बीमारियों से संबंधित हो सकते हैं। इसलिए मरीज की सही जांच, आवश्यक टैस्ट और समय पर आगे के इलाज के लिए रैफर करने की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। योजना के तहत सामुदायिक स्तर पर मरीजों की निगरानी और इलाज की निरंतरता के लिए ब्लॉक मैडीकल अधिकारियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा।

हर 15 दिन में होगी प्रगति की समीक्षा 

योजना को लागू करने के दौरान आने वाली कठिनाइयों की पहचान और समय पर समाधान के लिए राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के साथ हर 15 दिन में वीडियो कॉन्फ्रैंसिंग के माध्यम से समीक्षा की जाएगी। इस दौरान क्लीनिकों के संचालन, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों को मिल रही सुविधाओं की प्रगति का जायजा लिया जाएगा।

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