पंजाब में घट रही बच्चों की संख्या, छोटे परिवार का बढ़ा चलन... सामने आए हैरानीजनक आंकड़े

Edited By Kamini,Updated: 24 Sep, 2026 03:22 PM

declining number of children in punjab

पंजाब की आबादी को लेकर हैरानीजनक रिपोर्ट सामने आई है। दरअसल, पंजाब में बुजुर्ग आबादी बढ़ने का खतरा है और परिवारों में बच्चों की संख्या कम होने लगी है।

पंजाब डेस्क:  पंजाब की आबादी को लेकर हैरानीजनक रिपोर्ट सामने आई है। दरअसल, पंजाब में बुजुर्ग आबादी बढ़ने का खतरा है और परिवारों में बच्चों की संख्या कम होने लगी है। पंजाब में परिवारों की पारंपरिक संरचना तेजी से बदल रही है। कभी बड़े परिवारों को सामाजिक प्रतिष्ठा, ताकत और खेती-किसानी के लिए जरूरी माना जाता था, लेकिन अब छोटे परिवारों का चलन बढ़ रहा है।

EAC-PM की रिपोर्ट में खुलासा

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के वर्किंग पेपर ‘द घोस्ट ऑफ पॉपुलेशन पास्ट: हाउ पॉपुलेशन कंट्रोल पर्सिस्ट्स इन इंडिया’ में राज्य की घटती प्रजनन दर को लेकर अहम आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश की कुल प्रजनन दर (TFR) 1.9 है, जबकि पंजाब में यह घटकर 1.4 रह गई है। यह 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर से भी नीचे है। इसका मतलब है कि पंजाब में नई पीढ़ी की संख्या पिछली पीढ़ी के बराबर बनाए रखने की दर से भी कम हो रही है।

करियर और विदेश जाने की चाह का असर

रिपोर्ट में परिवारों के छोटे होने के पीछे बदलती सामाजिक और आर्थिक प्राथमिकताओं को भी अहम कारण बताया गया है। युवाओं में करियर बनाने, आर्थिक रूप से मजबूत होने और बेहतर अवसर तलाशने पर ज्यादा जोर है। शादी और बच्चों की योजना भी पहले की तुलना में देर से बनाई जा रही है। पंजाब में विदेश जाने की बढ़ती प्रवृत्ति का असर भी विवाह और पारिवारिक ढांचे पर पड़ रहा है। कई युवा नौकरी और करियर को प्राथमिकता देते हुए परिवार बढ़ाने का फैसला बाद में कर रहे हैं। इसका असर राज्य की कुल प्रजनन दर में दिखाई दे रहा है।

पंजाब की आबादी की औसत उम्र

घटती जन्म दर के साथ पंजाब की आबादी की औसत उम्र भी देश के मुकाबले अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब की मीडियन एज करीब 35 वर्ष है, जबकि देश की औसत उम्र लगभग 30 वर्ष है। इससे पंजाब की आबादी के अपेक्षाकृत तेजी से उम्रदराज होने का संकेत मिलता है। आने वाले वर्षों में इसका असर कामकाजी उम्र की आबादी और बुजुर्गों के बीच संतुलन पर पड़ सकता है। बुजुर्ग आबादी का अनुपात बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा और पेंशन जैसी व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव की स्थिति बन सकती है।

पंजाब की TFR कम

आंकड़ों के अनुसार, देश की TFR 1.9 के मुकाबले पंजाब में यह 1.4 है। वहीं हरियाणा की TFR 1.9 और हिमाचल प्रदेश की 1.5 बताई गई है। दिल्ली में यह आंकड़ा 1.2 है। बिहार और उत्तर प्रदेश को छोड़ने पर देश की औसत TFR करीब 1.6 रह जाती है। अगर बात करें तो पंजाब की TFR हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से भी कम है। 

स्कूलों में घट सकती है छात्रों की संख्या

कम जन्म दर का असर आने वाले वर्षों में स्कूलों पर भी दिखाई दे सकता है। बच्चों की संख्या कम होने से स्कूलों में दाखिले घट सकते हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों के स्कूलों के संचालन, संसाधनों और संस्थानों की योजना बनाने में नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

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