Edited By Kalash,Updated: 15 Jan, 2026 12:15 PM
तापमान में लगातार गिरावट के कारण हाड़ कंपा देने वाली ठंड ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।
तरनतारन (रमन): तापमान में लगातार गिरावट के कारण हाड़ कंपा देने वाली ठंड ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। इसके कारण छोटे बच्चे और बुजुर्ग पूरी तरह से घरों में कैद हो गए हैं। इस बीच, लोग अक्सर ठंड से राहत पाने के लिए रूम हीटर और आग का सहारा लेते देखे जा रहे हैं, लेकिन घरों के कमरों के अंदर जलने वाली कोयले और लकड़ी की अंगीठी, जो कई तरह की बीमारियों का कारण बन रही है, वह इंसान की मौत का कारण भी बन सकती है, जिसके लिए सावधानी बरतनी जरूरी है। गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों में जलाई गई अंगीठी की जहरीली का गैस के कारण 2 महीने के नवजात सहित पांच व्यक्तियों की मौत हो चुकी है।
लोग हो रहे विभिन्न बीमारियों के शिकार
जानकारी देते हुए जिला सेहत अधिकारी डॉक्टर सुखबीर कौर औलख ने बताया की अक्सर लोग ठंड से बचने के लिए कमरों में कोयले के चूल्हे जलाते हैं, जिसके कारण जान का नुकसान हो सकता है। डॉ. ने कहा कि कोयले के चूल्हे से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत नुकसानदायक साबित हो सकती है। इससे उसके पेट में पल रहे बच्चे को भी नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
इंसानों को सांस की बीमारियां होने का खतरा
हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर पंजाब के पूर्व डायरेक्टर डॉ. शमशेर सिंह ने कहा कि लोग अक्सर ठंड से बचने के लिए कोयले का चूल्हा जलाते हैं, जिससे वे सांस की कई बीमारियों, जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस वगैरह के शिकार हो सकते हैं। डॉ. शमशेर सिंह ने कहा कि कोयले की आग से निकलने वाली जहरीली गैस की वजह से मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। जिससे उसे घबराहट और दूसरी दिक्कतें होती हैं। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही फेफड़ों में इंफेक्शन होने लगता है। जिससे इंसान ब्रोंकाइटिस का शिकार हो जाता है। उन्होंने कहा कि कोयले के चूल्हे के लगातार संपर्क में आने से इंसान को फेफड़ों का कैंसर हो सकता है क्योंकि कोयले के चूल्हे से निकलने वाले धुएं से कई तरह की बीमारियां छोटा रूप लेती हैं और फिर गंभीर हो जाती हैं। इसलिए कोयले के चूल्हे से बचना चाहिए।
बच्चे भी भयानक बीमारियों का हो रहे शिकार
सरकारी अस्पताल तरनतारन में तैनात बच्चों की माहिर डॉक्टर डॉ. नीरज लता ने जानकारी देते हुए बताया कि सर्दियों में लोग कमरा बंद करके कोयले और लकड़ी की अंगीठी जलाकर राहत पाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कमरे में मौजूद छोटे बच्चे इससे निकलने वाली ज़हरीली गैस और धुएं की वजह से कई तरह की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जिसमें वे छाती की बीमारियां, सांस की दिक्कतें, फेफड़ों का कैंसर, सर्दी-जुकाम, खांसी, अस्थमा के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि खासकर छोटे बच्चों को आग के पास नहीं बिठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आग और कोयले का धुआं छोटे बच्चों की आंखों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे बच्चे छाती की बीमारियों और सांस की बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। चूंकि बच्चों की स्किन नाजुक होती है, इसलिए उन्हें स्किन की बीमारियां भी हो सकती हैं।
त्वचा की बीमारियां फैल रही हैं
पूर्व सीनियर मेडिकल अफसर डॉ. एसएस मान ने बताया कि कोयले से जलने वाली अंगीठी की वजह से लोग त्वचा की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, जिसमें लगातार आग के पास बैठने से त्वचा रूखी, खुजली और जलन होने लगती है, इस दौरान मरीज त्वचा की बीमारियों का शिकार हो रहा है और उसकी त्वचा लगातार लाल रहती है और उस पर धब्बे और फुंसियां निकलने लगती हैं।डॉ. मान ने बताया कि कोयले की अंगठी और लगातार आग जलाना इंसानों के लिए नुकसानदायक है।
कार्बन मोनोऑक्साइड है जानलेवा
जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डॉ गुरप्रीत सिंह राय ने बताया कि कोयले की अंगीठी जलाने के दौरान जब कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बंद कमरे में निकलती है, तो कमरे में ऑक्सीजन की कमी होने से व्यक्ति बेहोश हो सकता है और कोमा में भी जा सकता है। डॉ. ने बताया कि ऐसे कई मामलों में लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसलिए बंद कमरे में आग जलाना व्यक्ति के लिए जानलेवा साबित हो रहा है, जिससे व्यक्ति कई तरह की मानसिक बीमारियों का भी शिकार हो रहा है। उन्होंने बताया कि कोयले की आग से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस व्यक्ति के खून में ऑक्सीजन की सप्लाई को ब्लॉक करने में भूमिका निभाती है, जिससे व्यक्ति बेहोश हो सकता है और उसकी मौत भी हो सकती है। उन्होंने ने बताया कि कोयले के चूल्हे से निकलने वाली ज़हरीली गैस से कमरे में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे इंसान को सांस लेने में दिक्कत होती है, साथ ही उसे दिल की कई तरह की बीमारियां होने लगती हैं। डॉ. ने बताया कि इस ज़हरीली गैस की वजह से इंसान को फेफड़ों और पेट की भयानक बीमारियां हो सकती हैं, जिससे वह कैंसर का भी शिकार हो सकता है। डॉ. राय ने बताया कि कोयले और लकड़ी के चूल्हे और ठंड से बचने के लिए आग जलाना लोगों को दिल की बीमारियों का शिकार बना रहा है। उन्होंने बताया कि कार्बन मोनोऑक्साइड गैस इंसान के खून में ऑक्सीजन कम कर देती है, जिससे दिल पर प्रेशर बढ़ता है और यह हार्ट अटैक का मुख्य कारण बन सकता है। डा. ने बताया कि आग से निकलने वाली ज़हरीली गैस और ज़हरीले धुएं से बचना ही इंसानों के लिए अच्छा साबित होगा।
ना करें यह काम
आग को कभी भी बंद कमरे के अंदर नहीं जलाना चाहिए। कोयले की अंगठी कभी भी बंद कमरे में नहीं जलाना चाहिए और इससे पूरी तरह बचना चाहिए क्योंकि इससे इंसान की मौत हो सकती है। कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला रखें ताकि ताजा हवा अंदर आ सके और ऑक्सीजन की कमी कमरे में इंसान को महसूस ना हो। वेंटीलेशन का प्रबंध होना चाहिए। कोयल जब तक पूरी तरह लाल ना हो जाए तब तक अंगीठी को कमरे के अंदर ना ले और रात के समय अंगीठी को कमरे के बाहर रखने के बाद ही सोए।
कार्बन मोनोऑक्साइड के यह है लक्षण
कार्बन मोनोऑक्साइड निकालने के दौरान इंसान को सिरदर्द, चक्कर आना, पेट खराब होना, जी मचलाना, उल्टी महसूस होना, बहुत ज़्यादा कमज़ोरी और सुस्ती महसूस होना, सोचने और फ़ैसले लेने में दिक्कत, दम घुटना, सांस लेने में तकलीफ़।
जिले में हाल ही में अंगीठी से 5 लोगों की जान चली गई
जंडियाला रोड पर गुरमीत सिंह उर्फ सोनू और उसकी पत्नी जसबीर कौर की मौत तब हुई जब उन्होंने रात में अपने कमरे में लकड़ी को बाल्टे में आग जलाकर ठंड से राहत पाने के लिए कमरा बंद कर लिया, इसके स्वरूप ऑक्सीजन की कमी होने और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस चढ़ने के कारण सुबह उनकी मौत हो गई। इसी तरह, कुछ दिन पहले जिले के अलीपुर गांव में अर्शदीप सिंह, उसकी पत्नी और दो महीने के बेटे गुरबाज सिंह की जहरीली गैस की वजह से मौत हो गई क्योंकि अर्शदीप सिंह ने अपने कमरे में कोयले की अंगठी जलाई थी और कमरा बंद कर लिया था।
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