Edited By Kalash,Updated: 23 May, 2026 05:35 PM
“हरी दिखने वाली सब्जी क्या सच में ताजा है?” “चमकदार फल क्या प्राकृतिक तरीके से पके हैं?” आज यह सवाल हर घर की रसोई से जुड़ चुका है।
बठिंडा (विजय वर्मा): “हरी दिखने वाली सब्जी क्या सच में ताजा है?” “चमकदार फल क्या प्राकृतिक तरीके से पके हैं?” आज यह सवाल हर घर की रसोई से जुड़ चुका है। खेतों से मंडियों तक सब्जियों और फलों पर हो रहे रासायनिक प्रयोग अब लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। अधिक उत्पादन, जल्दी पकाने और लंबे समय तक ताजा दिखाने की होड़ में किसान, व्यापारी और कुछ कारोबारी ऐसे रसायनों का उपयोग कर रहे हैं, जो धीरे-धीरे लोगों के शरीर में जहर घोल रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार फल और सब्जियां शरीर को पोषण देने के लिए खाई जाती हैं, लेकिन अब वही खाद्य पदार्थ कैंसर, किडनी रोग, हार्मोन असंतुलन और त्वचा रोग जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन रहे हैं। पंजाब सहित देश के कई हिस्सों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है।
जहरीले रसायनों का बढ़ता इस्तेमाल
खेती में कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल वर्षों से हो रहा है, लेकिन अब स्थिति और खतरनाक हो चुकी है। फलों को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड और एथिलीन जैसे रसायनों का उपयोग किया जा रहा है। आम, केला, पपीता और खरबूजे जैसे फलों को कृत्रिम रूप से पकाकर बाजार में भेजा जाता है। इसी तरह हरी सब्जियों को चमकदार और ताजा दिखाने के लिए उन पर रंग और केमिकल स्प्रे किए जाते हैं। कई जगह पालक, मटर और भिंडी जैसी सब्जियों को हरे रंग के घोल से धोया जाता है ताकि वे देखने में आकर्षक लगें। विशेषज्ञ बताते हैं कि कुछ व्यापारी सब्जियों पर वैक्स की परत भी चढ़ाते हैं ताकि वे लंबे समय तक खराब न हों। यह वैक्स शरीर में जाकर पाचन तंत्र को प्रभावित करता है।
कैंसर और किडनी रोग का बढ़ा खतरा
डॉक्टरों के अनुसार लगातार रसायनयुक्त खाद्य पदार्थ खाने से शरीर में जहरीले तत्व जमा होने लगते हैं। इससे लीवर, किडनी और फेफड़ों पर असर पड़ता है। कई रसायन ऐसे हैं जो लंबे समय में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का कारण बन सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर इन रसायनों का असर सबसे अधिक पड़ता है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण उनके शरीर पर जहरीले तत्व जल्दी प्रभाव डालते हैं। इससे हार्मोनल बदलाव, एलर्जी, पेट की समस्याएं और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है।
कैल्शियम कार्बाइड बना ‘धीमा जहर’
फलों को पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाला कैल्शियम कार्बाइड सबसे खतरनाक रसायनों में माना जाता है। यह फल को बाहर से पीला और आकर्षक बना देता है, लेकिन अंदर से फल पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से नहीं पकता। विशेषज्ञों के मुताबिक इस रसायन में आर्सेनिक और फास्फोरस जैसे जहरीले तत्व पाए जाते हैं, जो सिरदर्द, उल्टी, चक्कर और तंत्रिका तंत्र की समस्याएं पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक इसके सेवन से कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
दूध, पानी और इंजेक्शन से बढ़ाई जा रही सब्जियों की चमक
कुछ क्षेत्रों में सब्जियों को जल्दी बड़ा करने के लिए ऑक्सीटोसिन जैसे इंजेक्शन लगाए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। लौकी, कद्दू, तरबूज और बैंगन जैसी सब्जियों को असामान्य रूप से तेजी से बढ़ाने के लिए ऐसे खतरनाक तरीके अपनाए जाते हैं। इसके अलावा मंडियों में सब्जियों पर गंदा पानी छिड़कने और केमिकल मिले घोल का उपयोग करने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। इससे बैक्टीरिया और संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
कैसे पहचानें रसायनयुक्त फल और सब्जियां
विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ता कुछ सावधानियां अपनाकर काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं।
बहुत ज्यादा चमकदार और एक जैसे रंग वाले फल खरीदने से बचें।
यदि फल बाहर से पका और अंदर से कच्चा हो तो वह कृत्रिम रूप से पकाया गया हो सकता है।
सब्जियों का रंग जरूरत से ज्यादा गहरा या अस्वाभाविक लगे तो सतर्क रहें।
मौसम से बाहर मिलने वाले फलों और सब्जियों में रसायनों की संभावना अधिक होती है।
उपयोग से पहले फलों और सब्जियों को अच्छी तरह पानी से धोएं।
नमक या बेकिंग सोडा मिले पानी में कुछ देर भिगोने से कई रसायनों का असर कम किया जा सकता है।
ऑर्गेनिक खेती की ओर बढ़ रहा रुझान
रसायनों के बढ़ते खतरे के बीच अब लोग जैविक यानी ऑर्गेनिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कई किसान बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के खेती करने लगे हैं। हालांकि ऑर्गेनिक उत्पाद महंगे होते हैं, लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से अधिक सुरक्षित माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को भी जैविक खेती को बढ़ावा देने और रसायनों के अनियंत्रित उपयोग पर सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है। मंडियों में नियमित जांच, लैब टेस्ट और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई से ही इस खतरे को कम किया जा सकता है।
प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी
खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर जांच अभियान चलाने का दावा करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी चिंताजनक हैं। कई बार सैंपल फेल होने के बावजूद कार्रवाई सीमित रह जाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक किसानों और व्यापारियों को जागरूक नहीं किया जाएगा और उपभोक्ता सतर्क नहीं होंगे, तब तक यह समस्या खत्म नहीं होगी।
सेहत से समझौता पड़ सकता है भारी
आज हर व्यक्ति चाहता है कि उसके परिवार को ताजा और पौष्टिक भोजन मिले, लेकिन बाजार की चमक-दमक के पीछे छिपा रासायनिक सच डराने वाला है। थोड़े से मुनाफे के लिए लोगों की सेहत के साथ किया जा रहा यह खिलवाड़ आने वाले समय में बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है। जरूरत इस बात की है कि लोग जागरूक बनें, प्राकृतिक और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें तथा प्रशासन भी इस गंभीर मुद्दे पर सख्ती दिखाए। क्योंकि यदि थाली में जहर पहुंच गया, तो अस्पतालों की लाइनें और लंबी होना तय है।
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