Edited By Kamini,Updated: 03 Jul, 2026 12:08 PM

जिला गुरदासपुर रावी दरिया के मकोड़ा पतन के पार बसे सात गांवों के लोगों का सड़क संपर्क एक बार फिर देश से टूट गया है।
गुरदासपुर (विनोद): जिला गुरदासपुर रावी दरिया के मकोड़ा पतन के पार बसे सात गांवों के लोगों का सड़क संपर्क एक बार फिर देश से टूट गया है। मकोड़ा पतन रावी दरिया पर बना अस्थायी पलटून पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब संबंधित विभाग द्वारा पुल को पूरी तरह से खोल दिए जाने के कारण लोगों को नाव के जरिए सफर करना पड़ रहा है। जिसके विरोध में रावी दरिया के पार बसे 7 गांव के सरपंचों ने ऐलान किया है कि पुल के लिए केंद्र सरकार की और से पैसे भेज दिए गए हैं, लेकिन अभी तक पंजाब सरकार ने टैंडर नहीं लगाया जिसके चलते पुल के निर्माण में देरी हो रही है।
सरपंचों का कहना है कि वह आज डिप्टी कमिश्नर गुरदासपुर को मिलने जा रहे हैं अगर 10 दिनों के अंदर अंदर स्थायी पुल के निर्माण का काम शुरू ना किया गया, तो वह रावी दरिया के पार बसे गांवों के सरपंच अपना इस्तीफा विरोध स्वरूप पंजाब सरकार को भेज देंगे। इसके साथ ही संर्घष शुरू कर जम्मू-अमृतसर नैशनल हाईवे को भी जाम करेंगे और साल 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
क्या कहना है नाव चालक नछत्तर सिंह का
मकोड़ा पत्तन पर नाव चलाने वाले नछत्तर सिंह, जो 30 साल से नाव चला रहा है का कहना है कि जब दरिया में जल स्तर बढ़ जाता है तो बहुत मुश्किल हो जाती है। इस साल बारिश बहुत ज्यादा हुई है। जिस कारण पलटून पुल का कुछ हिस्सा बह जाने के बाद आज विभाग ने मशीनें लगाकर पुल को खोल दिया है। नछत्तर सिंह ने कहा कि मकोड़ा पत्तन पर पुल बनाने की मांग बीते 75 साल से की जा रही है, परंतु सरकार, राजनीतिक दल तथा अन्य नेताओं से सिवा आश्वासन के कुछ नहीं मिला।बरसात के मौसम के दौरान पलटून पुल न होने की बात बताते हुए नछत्तर सिंह कहते हैं, 8 महीने यह पलटून पुल बना रहता है, लेकिन चार महीने गांव वाले नाव पर निर्भर रहते हैं जो सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चलती है।
वर्ष 2022 में पंजाब के मंत्री ने भी लोगों को गुमराह किया
इस लोगों ने बताया कि अगस्त 2022 में पंजाब सरकार के पूर्व मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने मकोड़ा पत्तन का दौरा किया था तथा घोषणा की थी कि केंद्र सरकार से मकोड़ा पत्तन तथा कीडि पत्तन पर बनने वाले स्थायी पुलों के लिए 190 करोड़ रुपए की प्राप्त हो चुके हैं तथा 15 दिन में दोनों ही पुलों को बनाने का काम शुरू हो जाएगा। जबकि आज तक एक ईंट भी नहीं लगी है इन दोनों पुलों के निर्माण के लिए।
इस मौके पर जब पुल को मशीनों से विभाग द्वारा खोला जा रहा था तो वहां पर महिलाओं सहित अन्य लोगों ने गुस्सा दिखाते हुए कहा कि हम लोग तीन तरफ से दरिया तथा एक तरफ से पाकिस्तान की सीमा में बंद हैं। क्या हम भारतीय नागरिक नहीं है। आपात स्थिति में मरीजों तक को अस्पताल तक ले जाना कठिन हो जाता है। हमें गुरदासपुर-पठानकोट पहुंचना कठिन है जबकि पाकिस्तान जाना आसान है।
लस्सियां गांव की पूर्व सरपंच सुनीता देवी का कहना है कि हम अपनी शिकायतें करते-करते थक गए हैं। ऐसा लगता है कि हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हमारे गांव ने एक बार चुनाव का बायकॉट किया क्योंकि कोई भी हमारी तकलीफ पर ध्यान नहीं दे रहा है, परंतु उसका भी लाभ नही हुआ। इस मौके पर लोगों ने गुस्सा प्रकट करते हुए कहा कि एक तो हम दसवीं कक्षा के आगे अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने में असमर्थ है। क्योंकि दरिया पार करना प्रतिदिन मुश्किल है। दरिया में पानी अधिक होने पर किश्ती भी दरिया मे नहीं डाली जाती, जिस कारण कई बार तो बच्चे परीक्षा देने से भी वंचित हो जाते हैं।
किश्ती सुबह 7 बजे चलती है, यदि पानी दरिया में कम हो तो प्रात:काल जो छात्र गुरदासपुर, दीनानगर आदि शहरों में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं उन्हें दरिया के पानी के रास्ते निकलना पड़ता है। लड़के तो दरिया पार कर लेते हैं, परंतु लड़कियों के लिए दरिया पार करना मुश्किल होता है। यदि स्थायी पुल बन जाए तो फिर हम भी भारतीय नागरिक होने का गर्व महसूस कर सकते हैं। यही कारण है कि हमें अपने बच्चों के रिश्ते करने में भी कठिनाई पेश आती है।
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