बरनाला: 50 वार्डों में 196 उम्मीदवार, पर असली खेल 49 निर्दलीयों का, किंगमेकर बनेंगे या वोट बांटेंगे?

Edited By Vatika,Updated: 18 May, 2026 09:06 AM

barnala 196 candidates across 50 ward

गर निगम बरनाला के चुनावों के लिए नामांकन भरने के आखिरी दिन के बाद शहर का राजनीतिक माहौल पूरी

बरनाला(विवेक सिंधवानी, रवि): नगर निगम बरनाला के चुनावों के लिए नामांकन भरने के आखिरी दिन के बाद शहर का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। कुल 50 वार्डों के लिए 196 उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं और कई वार्डों में मुकाबला बेहद दिलचस्प और सीधी टक्कर वाला बन गया है। पर इस बार के चुनावों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बने हैं,  49 निर्दलीय (आजाद) उम्मीदवार, जो किसी भी पार्टी की छत्र-छाया के बिना मैदान में हैं।

आप के 50, कांग्रेस के 39, अकाली और भाजपा के 28-28
सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने शहर के सभी 50 वार्डों में उम्मीदवार उतारे है। मुख्य विपक्षी कांग्रेस केवल 39 वार्डों में ही उम्मीदवार उतार सकी है। दूसरी ओर पंजाब की राजनीति के पुराने साझेदार रहे शिरोमणि अकाली दल और भाजपा सिर्फ 28-28 वार्डों में ही चुनाव लड़ रहे हैं और बहुजन समाज पार्टी केवल 2 वार्डों में मैदान में है।

49 निर्दलीय , किंगमेकर या खेल बिगाड़ने वाले?
इस बार के चुनावों का सबसे दिलचस्प पहलू है 49 निर्दलीय उम्मीदवारों की भारी संख्या। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ये निर्दलीय उम्मीदवार राजनीतिक पार्टियों के vote bank (वोट बैंक) को बड़ी चोट पहुंचा सकते हैं। कई वार्डों में जीत-हार का अंतर तय करने में ये निर्दलीय उम्मीदवार 'किंगमेकर' की भूमिका निभा सकते हैं। ये निर्दलीय उम्मीदवार ज्यादातर वो लोग हैं जो या तो किसी पार्टी से टिकट न मिलने के कारण बागी हो गए हैं या फिर अपने वार्ड में निजी प्रभाव के दम पर मैदान में उतरे हैं। इनमें से कुछ उम्मीदवारों का अपने वार्ड में मजबूत जमीनी आधार भी है।

सिर्फ 6 वार्डों में सीधी टक्कर
शहर के ज्यादातर वार्डों में त्रिकोणीय या बहु-कोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। पर शहर के 6 वार्ड — वार्ड नंबर 1, 4, 5, 11, 13 और 41 — ऐसे हैं जहां सिर्फ दो-दो उम्मीदवारों द्वारा ही नामांकन पत्र भरे गए हैं। इन वार्डों में आमने-सामने की सीधी टक्कर होगी जो चुनावों को और भी रोचक बना देती है।

पार्टियों की अधूरी तैयारी का फायदा किसे?
कांग्रेस और अकाली दल द्वारा सभी वार्डों में उम्मीदवार न उतार पाना यह साबित करता है कि इन पार्टियों का जमीनी ढांचा कमजोर हुआ है। वो वार्ड जहां इन पार्टियों के उम्मीदवार नहीं हैं, वहां निर्दलीय उम्मीदवार इन पार्टियों के पारंपरिक वोटरों को अपनी ओर खींच सकते हैं। अब सभी नजरें 26 मई पर टिकी हैं — क्या आप अपनी सत्ता बरकरार रखेगी, क्या कांग्रेस वापसी करेगी या फिर 49 निर्दलीय उम्मीदवार सबकी खेल बिगाड़ देंगे?

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