केंद्र का एक और पंजाब विरोधी फैसला! कैबिनेट मंत्री ने Notification की कॉपी दिखा कह दी बड़ी बातें

Edited By Urmila,Updated: 01 Nov, 2025 04:35 PM

another anti punjab decision by the central government

पंजाब सरकार ने पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट और सिंडिकेट को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले का कड़ा विरोध किया है।

चंडीगढ़ : पंजाब सरकार ने पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट और सिंडिकेट को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले का कड़ा विरोध किया है। कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने नोटिफिकेशन की कॉपी दिखाकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। साथ ही, उन्होंने पंजाब भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू, सुनील जाखड़ और अश्वनी शर्मा के इस्तीफे की भी मांग की है।

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह पंजाब का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है। इसकी स्थापना 1882 में लाहौर में हुई थी। देश के बंटवारे के बाद इसे चंडीगढ़ स्थानांतरित कर दिया गया था। लेकिन अब केंद्र ने एक नोटिफिकेशन जारी कर 59 साल पुरानी सीनेट और सिंडिकेट को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह शिक्षा का केंद्रीकरण करके राज्यों की भाषाओं को खत्म करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि पहले सीनेट में 90 सदस्य होते थे, जिन्हें घटाकर 31 कर दिया गया है, जिसमें केवल 18 निर्वाचित सदस्य, 6 मनोनीत और 7 पदेन सदस्य होंगे। चीमा ने कहा कि इस तरह सीनेट में 13 सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से केंद्र के होंगे।
 
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा और केंद्र सरकार में हिटलर की आत्मा प्रवेश कर गई है और उनके कदम तानाशाही की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीनेट सदस्यों की संख्या कम करने के साथ-साथ उनकी शक्तियां भी कम कर दी गई हैं। उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ और कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा से पूछा कि क्या वे इस फैसले पर इस्तीफा देंगे या अपनी कुर्सी बचाने के लिए भाजपा के आगे घुटने टेकेंगे? उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार उन संस्थानों पर कब्जा करना चाहती है जिनमें राज्यों को स्वायत्तता प्राप्त थी। चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार अपने अधिकारों की रक्षा मजबूती से करेगी और इस फैसले के खिलाफ लड़ेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र पंजाबियों को इस तरह दबा नहीं सकता।

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