Edited By Kalash,Updated: 04 Jul, 2026 01:44 PM

एक तरफ शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के सख्त निर्देश हैं तो दूसरी तरफ सरकारी आदेशों को सरेआम ठेंगा दिखाते हुए सरकारी स्कूलों के अध्यापक ड्यूटी ज्वाइन करने ही नहीं पहुंच रहे।
लुधियाना (विक्की): एक तरफ शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के सख्त निर्देश हैं तो दूसरी तरफ सरकारी आदेशों को सरेआम ठेंगा दिखाते हुए सरकारी स्कूलों के अध्यापक ड्यूटी ज्वाइन करने ही नहीं पहुंच रहे। मामला 'ड्रग एंड सोशियो इकोनॉमिक सैंसस' के तहत मैपिंग और ट्रेनिंग के लिए बुलाई गई मीटिंग का है जहां जायज मजबूरियों का हवाला देकर किसी भी अध्यापक ने अपनी हाजिरी नहीं लगवाई। अध्यापकों के इस अड़ियल और लापरवाह रुख से भड़का प्रशासन अब पूरी तरह सख्ती पर उतर आया है और ड्यूटी को सीरियस न लेने वाले अध्यापकों को सीधे तौर पर कार्रवाई की चेतावनी दे दी है। दूसरी ओर, अध्यापकों ने भी इसके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे जिला प्रशासन की तानाशाही करार दिया है।
अध्यापकों ने रोष जताते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन अध्यापकों के साथ बंधुआ मजदूरों जैसा व्यवहार कर रहे हैं। अध्यापकों पर लगातार बी.एल.ओ., एस.आई.आर. कंट्रोल रूम, तीर्थ यात्रा योजना, मावां-धीयां दा सत्कार योजना, सैंसस, सोशियो एंड ड्रग सैंसस और मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी गैर-शैक्षणिक ड्यूटियों का भारी बोझ डाल दिया गया है। जून की भीषण गर्मी की छुट्टियों में अध्यापकों से लगातार सेंसस की ड्यूटियां करवाई गईं। इसके तुरंत बाद नीट की परीक्षा में ड्यूटी लगा दी गई और फिर एक अन्य परीक्षा का बोझ भी अध्यापकों पर डाल दिया गया। हद तो तब हो गई जब पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की कंपार्टमैंट परीक्षाओं के शुरू होते ही अध्यापकों पर ऑनलाइन मार्किंग की ट्रेनिंग का दबाव भी बना दिया गया। अध्यापकों का कहना है कि अगर वे साल भर केवल सरकार की ड्यूटियां और सर्वे ही करते रहेंगे, तो स्कूलों में गरीब बच्चों को पढ़ाएंगे कब?
बता दें कि ताजा मामला जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी के 2 जून को जारी एक के संबंध में है, जहां अध्यापकों को ड्यूटी लगाई थी लेकिन संबंधित अध्यापकों में से एक भी अध्यापक ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए नहीं पहुंचा जिसके चलते 2 जून को देर शाम विभाग को यह पत्र जारी करते हुए अध्यापकों ने देश दिए गए कि वे 3 जून को अपनी ड्यूटी किसी विभाग में ज्वाइन करें हालांकि अधिकतर अध्यापकों ने फिर भी यह ड्यूटी ज्वाइन नहीं की जिसको लेकर विभाग के अधिकारी भी हैरान है।
'ड्रग एंड सोशियो इकोनॉमिक सैंसस' के नाम पर हो रहा प्रचार
अध्यापकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 'ड्रग एंड सोशियो इकोनॉमिक सैंसस' के नाम पर कथित 'आप' सरकार का प्रचार हो रहा है जिसके तहत सरकारी मशीनरी और फंड्स का दुरुपयोग करके केवल राजनीतिक जमीन मजबूत की जा रही है। एक तरफ तो इन ड्यूटियों को स्वैच्छिक बताकर प्रचारित किया जाता है लेकिन जब कोई अध्यापक वहां पहुंचता है तो उससे जबरन फॉर्म भरवा लिया जाता है कि वह यह ड्यूटी अपनी मर्जी से कर रहा है। यह सीधे तौर पर अध्यापकों के साथ धोखा और मानसिक उत्पीड़न है। अपनी मर्जी से काम करने की बात कहने वाला प्रशासन दूसरी तरफ ड्यूटी पर न आने पर नोटिस भेजने की धमकियां दे रहा है।
3 स्कूलों के ही 100 से ज्यादा अध्यापकों पर तानाशाही का चाबुक
अध्यापकों ने जिला शिक्षा अफसर (स) द्वारा जारी पत्र पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि तानाशाही रवैया अपनाते हुए सभी अध्यापकों को हर हाल में अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर में हाजिर होने के सख्त आदेश दिए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस लिस्ट में शहर के केवल 3 मुख्य स्कूलों से ही 100 से ज्यादा अध्यापकों को जबरन इस काम में घसीटा गया है जिनमें से अकेले पीएम श्री सरकारी सीनियर सैकेंडरी स्कूल सिमिट्री रोड, सरकारी सीनियर सैकेंडरी स्कूल पी.ए.यू. और एक अन्य सरकारी सीनियर सैकेंडरी स्कूल के अध्यापक शामिल हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई हाजिर नहीं हुआ तो उस पर और स्कूल प्रमुख पर तुरंत विभागीय कार्रवाई की जाएगी और केवल बी.एल.ओ. व एस.आई.आर. ड्यूटी वालों को ही इससे छूट मिलेगी। अध्यापकों ने साफ चेतावनी दी है कि सरकार और विभाग के इस अड़ियल व तानाशाही रवैये को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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