अध्यापकों को झटका, तबादलों को लेकर नए आदेश जारी

Edited By Kalash,Updated: 20 Jun, 2026 01:07 PM

teachers transfer cancel

पूरे 1 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार पंजाब में ट्रांसफर पोर्टल खुला, तो दूर-दराज के जिलों से रोजाना सैंकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर स्कूलों में पहुंचने वाले अध्यापकों के चेहरे खिल उठे थे।

लुधियाना (विक्की): पूरे 1 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार पंजाब में ट्रांसफर पोर्टल खुला, तो दूर-दराज के जिलों से रोजाना सैंकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर स्कूलों में पहुंचने वाले अध्यापकों के चेहरे खिल उठे थे। घर के नजदीक स्टेशन मिलने की आस में बैठे इन अध्यापकों और स्टाफ मैंबर्स की उम्मीदों पर अब इलैक्शन ड्यूटी का साया मंडराने लगा है। दफ्तर डायरैक्टर स्कूल एजुकेशन (सैकेंडरी), पंजाब ने एक बड़ा झटका देते हुए इलैक्शन ड्यूटी पर तैनात स्टाफ के ट्रांसफर पर फिलहाल पूरी तरह से रोक लगा दी है। विभाग के इस नए आदेश ने उन अध्यापकों की चिंता बढ़ा दी है जो सालों से दूर के स्टेशनों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसी के साथ विभाग ने अधिकारियों को सभी आवेदकों का डाटा पोर्टल पर अपडेट करने की डेडलाइन देकर पूरे महकमे की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

चुनाव आयोग की गाइडलाइंस का हवाला, नहीं होंगे तबादले

विभाग द्वारा जारी किए गए पत्र में मुख्य चुनाव अफसर, पंजाब के आदेशों का विशेष तौर पर हवाला दिया गया है। पत्र के अनुसार, विशेष समरी रिवीजन (एस.आई.आर.) अवधि के दौरान जो भी अध्यापक, कम्प्यूटर फैकल्टी और नॉन-टीचिंग स्टाफ बी.एल.ओ. (बूथ लैवल ऑफिसर) या सैक्टर सुपरवाइजर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। चुनाव आयोग की गाइडलाइन्स को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है ताकि चुनावी काम में किसी भी तरह की रुकावट पैदा न हो। इस पूरी प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने के लिए विभाग ने बेहद कम समय दिया है। आदेश के मुताबिक, समूह स्कूल प्रमुखों और डी.ई.ओ. को हर हाल में डाटा वैरीफाई करना होगा। इसके लिए उन्हें पंजाब पोर्टल पर लॉग-इन करके 'स्टाफ मेन्यू' में जाना होगा, जहां दिए गए विशेष 'इलैक्शन ड्यूटी वैरिफिकेशन लिंक' पर क्लिक करके आवेदकों के डाटा को चैक करना होगा।

लापरवाही बरतने पर अधिकारियों पर गिरेगी गाज 

विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन आवेदकों की ड्यूटी बी.एल.ओ. या सैक्टर सुपरवाइजर के तौर पर लगी हुई है, अधिकारियों को उनके नाम के आगे बने लिंक पर 'यस' का विकल्प सिलैक्ट करना होगा। इलैक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के निर्देशों के मद्देनजर इस कार्य को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के आदेश दिए गए हैं। पत्र में चेतावनी दी गई है कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और किसी भी चूक के लिए संबंधित स्कूल प्रमुख या डी.ई.ओ. निजी तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे। संबंधित जिला शिक्षा अफसरों को भी यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सारा डाटा बिल्कुल सही और समय पर वैरीफाई हो जाए।

1 साल बाद खुले पोर्टल पर डी.डी.ओ. ने बिना वजह रद्द किए आवेदन

पूरे 1 साल के लंबे इंतजार के बाद खुले ट्रांसफर पोर्टल पर घर के नजदीक स्टेशन मिलने की आस लगाए बैठे अध्यापकों को बड़ा झटका लगा है। शिक्षा विभाग की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, अध्यापकों ने ट्रांसफर पॉलिसी 2019 के तहत जनरल ट्रांसफर 2026 के लिए अप्लाई किया था। लेकिन डी.डी.ओ. स्तर पर कुछ अध्यापकों के तबादलों के आवेदन रद्द कर दिए गए हैं, जिससे दूर-दराज के जिलों से रोजाना सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर स्कूलों में पहुंचने वाले अध्यापकों में भारी निराशा पाई जा रही है।

जानकारी देते हुए मास्टर कैडर यूनियन पंजाब के प्रदेश उपप्रधान जगजीत सिंह साहनेवाल और जिला इकाई के लुधियाना प्रधान व महासचिव गुरप्रीत सिंह दोराहा ने बताया कि पिछले दिनों पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने महिला कर्मचारियों की ड्यूटी उनके घरों से 40 किलोमीटर के दायरे में लगाने के बारे में बयान जारी किया था। इसके बाद अपने घरों से 200 से 300 किलोमीटर दूर बैठे अध्यापकों ने जनरल ट्रांसफर 2026 के तहत बड़ी उम्मीदों से अप्लाई किया था। लेकिन कुछ अध्यापकों के आवेदन को डी.डी.ओ. ने बिना किसी वजह के रद्द कर दिया। इस कारण ये अध्यापक अपने घरों के पास स्टेशन चुनने के अवसर से वंचित हो गए हैं।

अध्यापकों को स्टेशन चुनने का मौका देने की मांग 

इस मौके पर जिला इकाई के वित्त सचिव स्वर्ण सिंह, सीनियर उप प्रधान नवदीप सिंह, उप प्रधान राजविंदर सिंह, प्रैस सचिव मनोज कुमार, ब्लॉक प्रधान प्रभजोत सिंह, हरजिंदर सिंह खन्ना, हरविंदर सिंह पुरैन, नवीन कपिला, जगमीत सिंह, गुरबख्श सिंह और सरबजीत सिंह ने विभाग से पुरजोर मांग की है कि डी.डी.ओ. द्वारा रद्द किए गए आवेदन में तुरंत बदलाव करके उन्हें मंजूर किया जाए। यूनियन नेताओं ने कहा कि इन प्रभावित आवेदकों को जनरल ट्रांसफर के तहत स्टेशन चुनने का दोबारा अवसर दिया जाए ताकि अध्यापक अपने घरों के पास बिना किसी मानसिक तनाव के पूरी लगन से अपनी ड्यूटी कर सकें।

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