Edited By Vatika,Updated: 24 Oct, 2026 10:20 AM

महानगर के अति-पॉश इलाकों भाई रणधीर सिंह नगर और राजगुरु नगर में महिलाओं
लुधियाना (राज): महानगर के अति-पॉश इलाकों भाई रणधीर सिंह नगर और राजगुरु नगर में महिलाओं को सरेराह निशाना बनाकर सोने की चेन झपटने वाले बेखौफ लुटेरों को पकड़ने में कमिश्नरेट पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। थाना सराभा नगर की सीमा में महज 24 घंटे के अंतराल में हुई दो सनसनीखेज वारदातों के बाद पुलिस ने दोनों मामलों की सीसीटीवी (CCTV) फुटेज अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर जारी कर आम जनता से आरोपियों की पहचान करने और सूचना देने की अपील की है। पुलिस द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर मदद मांगने की इस पहल के बाद कमिश्नरेट पुलिस की कार्यशैली, मुस्तैदी और उसके पारंपरिक खुफिया तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर बोली पुलिस—'पहचानो और सूचना दो'
थाना सराभा नगर पुलिस ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध बाइक सवार लुटेरों की स्पष्ट सीसीटीवी फुटेज साझा की है। वीडियो जारी करते हुए पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति फुटेज में दिख रहे संदिग्धों, उनके हुलिए या उनकी मोटरसाइकिल को पहचानता है, तो वह तुरंत पुलिस के दिए गए नंबरों पर जानकारी साझा करे। पुलिस का दावा है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
BRS नगर और राजगुरु नगर में सरेराह हुई थीं वारदातें
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों थाना सराभा नगर के अधिकार क्षेत्र में लुटेरों ने कानून-व्यवस्था को सीधी चुनौती दी थी। BRS नगर (आई-ब्लॉक) दुकान से एक्टिवा पर घर लौट रही रजनी नामक महिला से बाइक सवार दो बदमाशों ने करीब 3 तोले की सोने की चेन झपटी थी, जिसमें गिरने से महिला के चेहरे और बाजू पर गंभीर चोटें आई थीं। राजगुरु नगर अपनी गाड़ी से उतरकर घर की दहलीज की तरफ पैदल बढ़ रही एक बुजुर्ग महिला को तीन हथियारबंद नकाबपोश लुटेरों ने घेरकर तेजधार हथियार तान दिए और सोने की चेन लूटकर फरार हो गए थे।
क्या फेल हो चुका है पुलिस का खुफिया तंत्र और मुखबिर नेटवर्क?
पुलिस द्वारा जनता से मदद मांगने के इस कदम ने शहर के सुरक्षा प्रबंधों और पुलिस की जांच क्षमता पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। जागरूक नागरिकों और कानूनी जानकारों का कहना है कि साफ और स्पष्ट सीसीटीवी फुटेज हाथ में होने के बावजूद अगर पुलिस को आरोपियों की पहचान के लिए सोशल मीडिया पर आम जनता की मदद की गुहार लगानी पड़ रही है, तो यह विभाग के जमीनी खुफिया तंत्र की विफलता को दर्शाता है। आमतौर पर पुलिस के पास स्थानीय मुखबिरों, हिस्ट्रीशीटरों की फाइलों, फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक और तकनीकी सर्विलांस का एक मजबूत ढांचा होता है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या जमीनी स्तर पर पुलिस की बीट प्रणाली और मुखबिर नेटवर्क पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है?
'सांप निकल जाने के बाद लकीर पीटने' जैसी स्थिति, लोगों में आक्रोश
इलाका निवासियों का आरोप है कि पॉश बस्तियों में न तो प्रभावी पीसीआर गश्त है और न ही संदिग्धों की नियमित नाकाबंदी। वारदात होने के समय राहगीर और महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं, जबकि पुलिस केवल घटना घट जाने के बाद 'सांप निकल जाने पर लकीर पीटने' का काम कर रही है। लोगों का कहना है कि जब तक पुलिस अपने गश्त तंत्र को सक्रिय नहीं करेगी और आदतन स्नैचरों के पुराने रिकॉर्ड को खंगालकर फील्ड में दबिश नहीं देगी, तब तक सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड करने मात्र से अपराधियों के हौसले पस्त होना मुश्किल है।