Edited By Urmila,Updated: 02 Nov, 2026 12:21 PM

परिवहन विभाग के आधिकारिक पोर्टल से मिलता-जुलता फर्जी पोर्टल बनाकर गाड़ियों की RC बिना जरूरी दस्तावेजों और RTO की मंजूरी के ही अप्रूव की जा रही हैं।
लुधियाना: पंजाब में वाहनों की RC ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि परिवहन विभाग के आधिकारिक पोर्टल से मिलता-जुलता फर्जी पोर्टल बनाकर गाड़ियों की RC बिना जरूरी दस्तावेजों और RTO की मंजूरी के ही अप्रूव की जा रही हैं। इस मामले में जालंधर, लुधियाना समेत पंजाब के अलग-अलग जिलों के 25 वाहन नंबर जांच के दायरे में आए हैं।
क्लर्क की जांच में खुला पूरा मामला
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब RTA क्लर्क नवदीप ने सिस्टम में कुछ वाहनों की फाइलों की जांच की। इस दौरान कई ऐसी RC सामने आईं, जो बिना जरूरी दस्तावेजों के ही अप्रूव हो चुकी थीं। हैरानी की बात यह रही कि कुछ फाइलों में आवेदक का नाम, पता और शपथपत्र तक मौजूद नहीं था। नियमों के मुताबिक RC ट्रांसफर के लिए करीब 12 दस्तावेज जरूरी होते हैं। इनमें प्रदूषण प्रमाणपत्र, इंजन नंबर का विवरण और खरीदार-विक्रेता के शपथपत्र समेत कई अहम कागजात शामिल हैं। लेकिन कथित फर्जी पोर्टल पर केवल आधार कार्ड अपलोड करके ही RC ऑटो-अप्रूव होने का दावा किया जा रहा है।
जालंधर-लुधियाना के वाहन भी शामिल
मामले की गंभीरता को देखते हुए जालंधर और लुधियाना RTO की ओर से संदिग्ध वाहनों की सूची तैयार की गई है। इसमें दोनों शहरों समेत अन्य जिलों के कुल 25 वाहन नंबर शामिल बताए जा रहे हैं। अब इन वाहनों के रिकॉर्ड और RC ट्रांसफर प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
चोरी की गाड़ियों को मिल सकता है फायदा?
इस फर्जीवाड़े ने परिवहन विभाग के ऑनलाइन सिस्टम की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आशंका जताई जा रही है कि अगर बिना इंजन नंबर और विक्रेता के शपथपत्र के RC ट्रांसफर संभव है, तो इसका फायदा चोरी के वाहनों को दूसरे नाम पर दर्ज कराने वाले लोग उठा सकते हैं। इससे भविष्य में हादसों, चालान और वाहन मालिकों की पहचान से जुड़ी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।
NIC करेगी सर्वर की फॉरेंसिक जांच
स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर परनीत शेरगिल ने कहा कि फिलहाल मामला उनके ध्यान में नहीं आया है। यदि आधिकारिक पोर्टल को बाईपास करके फर्जी तरीके से RC अप्रूव की जा रही हैं, तो NIC को पत्र लिखकर तकनीकी सिस्टम और सर्वर की फॉरेंसिक जांच करवाई जाएगी। अब जांच का मुख्य सवाल यही है कि बिना विभागीय मंजूरी के RC अप्रूव कैसे हुईं, फर्जी पोर्टल के पीछे कौन है और इस पूरे मामले में कितने वाहन प्रभावित हुए हैं।
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