मेडिकल स्टोर पर इन दवाइयों की बिक्री पर लगेगी रोक! पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन का बड़ा ऐलान

Edited By Vatika,Updated: 27 Oct, 2026 09:22 AM

major announcement by the chemists  association

स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन द्वारा नशे की रोकथाम के नाम पर केमिस्टों की दुकानों पर की जा रही

लुधियाना (राज):  स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन द्वारा नशे की रोकथाम के नाम पर केमिस्टों की दुकानों पर की जा रही ताबड़तोड़ चेकिंग के विरोध में पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाते हुए ऐलान किया है कि महानगर की करीब 4000 मेडिकल दुकानों पर अब प्रीगैबलिन सहित कोई भी हैबिट फॉर्मिंग (नशा संभावित) दवा नहीं बेची जाएगी। होलसेल और रिटेल कारोबारियों ने यह दवाइयां कंपनियों को वापस लौटाने का फैसला लिया है, जिसके तहत अगले एक हफ्ते में करोड़ों रुपए का स्टॉक कंपनियों को रिवर्स भेज दिया जाएगा।

पत्रकार वार्ता के दौरान एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी जी.एस. चावला ने स्वास्थ्य विभाग व पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मानसा की घटना के बाद पूरे पंजाब के केमिस्टों को एक ही तराजू में तौल दिया गया है। सरकार ने अभियान 'युद्ध नशे विरुद्ध' चलाया था, लेकिन धरातल पर ऐसा लग रहा है मानो यह 'युद्ध केमिस्टों के विरुद्ध' हो गया है। जो लोग चिट्टा और घातक नशे बेच रहे हैं, उन्हें पकड़ने की बजाय दवा कारोबारियों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। दुकानों पर आकर पुराने रिकॉर्ड और रजिस्टर खंगाले जा रहे हैं, जिससे पूरे दवा व्यापार में भारी खौफ व चिंता का माहौल बन गया है। जी.एस. चावला ने बताया कि रविवार को पूरे पंजाब के सभी जिला प्रधानों के साथ ऑनलाइन आपात बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में सभी ने एकसुर में रोष जताया कि न तो विभाग उनकी सुन रहा है और न ही पुलिस।

जांच के दौरान यदि किसी मेडिकल स्टोर पर स्टॉक में मात्र एक-दो पत्तों का भी फर्क मिल जाता है, तो तुरंत नोटिस थमा दिए जाते हैं और दुकानें तक सील की जा रही हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि जो चंद लोग वास्तव में नशे का अवैध धंधा कर रहे हैं, उन पर सख्त कार्रवाई हो, लेकिन उनकी आड़ में ईमानदार और बेकसूर केमिस्टों को प्रताड़ित करना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक इस तरह की अनावश्यक चेकिंग और उत्पीड़न बंद नहीं होता, तब तक प्राइवेट मेडिकल स्टोर्स पर ऐसी दवाइयां नहीं रखी जाएंगी। सरकार से मांग की गई है कि वह इन दवाओं को केवल सरकारी अस्पतालों या अपने सरकारी आउटलेट्स के जरिए मरीजों को मुहैया करवाए, ताकि जरूरतमंद मरीजों को परेशानी न हो। चावला ने कहा कि यदि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह उन्हें बातचीत के लिए बुलाते हैं, तो प्रतिनिधिमंडल अपनी बात खुलकर उनके समक्ष रखेगा।

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