Edited By Vatika,Updated: 31 Oct, 2026 10:27 AM

महानगर और जिले भर में अवैध खनन, वाहनों की ओवरलोडिंग और रेत-बजरी की ढुलाई के दौरान
लुधियाना (राज): महानगर और जिले भर में अवैध खनन, वाहनों की ओवरलोडिंग और रेत-बजरी की ढुलाई के दौरान नियमों की लगातार हो रही अनदेखी पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। डिप्टी कमिश्नर-कम-जिला मजिस्ट्रेट हिमांशु जैन की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि अब खनन विभाग द्वारा 'कम्प्लायंस सर्टिफिकेट' जारी किए जाने के बाद ही जिले में किसी माइनिंग साइट पर खनन कार्य संचालित करने की अनुमति दी जाएगी। डिप्टी कमिश्नर ने दो टूक चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों और इसमें लापरवाही बरतने वाले सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
कम्प्लायंस सर्टिफिकेट अनिवार्य, सुरक्षा मानकों की पालना के बिना नहीं चलेगी एक भी साइट :
समीक्षा बैठक के दौरान डिप्टी कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश जारी किए कि जिले की किसी भी माइनिंग साइट को तब तक संचालित नहीं होने दिया जाएगा जब तक संबंधित विभाग से सुरक्षा और नियमों की पालना का औपचारिक प्रमाण पत्र प्राप्त न हो। इस सर्टिफिकेट के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित साइट पर सभी निर्धारित सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन हो रहा है। प्रमाण पत्र के अभाव में खनन करने या वहां से खनिज सामग्री ढोने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
पंजीकृत टिप्पर ही ढोएंगे सामग्री, बिना नंबर प्लेट वाहन निकला तो जे.ई नपेंगे :-
सामग्री की ढुलाई को पारदर्शी बनाने के लिए डिप्टी कमिश्नर ने सख्त गाइडलाइंस तय की हैं। माइनिंग साइटों से केवल वही टिप्पर रेत-बजरी ले जा सकेंगे जो बाकायदा खनन विभाग के पोर्टल पर रजिस्टर्ड होंगे। इन वाहनों पर वैध नंबर प्लेट, चालू हालत में जीपीएस ट्रैकर और उड़ती धूल व सामग्री को रोकने के लिए तिरपाल से ढकना अनिवार्य होगा। यदि बिना नंबर प्लेट का कोई भी वाहन साइट से बाहर निकलता पाया गया, तो उस साइट पर तैनात संबंधित जूनियर इंजीनियर की सीधी व्यक्तिगत जवाबदेही तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। किसी भी वाहन को उसकी पंजीकृत क्षमता से अधिक वजन की तौल पर्ची अथवा फॉर्म-जे जारी नहीं किया जाएगा।
तय रूट पर ही दौड़ेंगे वाहन, पिलर लगाकर होगी जीपीएस मैपिंग :
ढुलाई के लिए सभी वाहनों को केवल पूर्व-स्वीकृत मार्गों पर ही चलने की अनुमति होगी। प्रत्येक वाहन की विंडस्क्रीन पर स्वीकृत रूट मैप चस्पा करना अनिवार्य होगा। साथ ही, जिन ग्रामीण लिंक सड़कों का इस्तेमाल किया जाएगा, उनके बारे में संबंधित ग्राम पंचायतों को भी पूर्व सूचना दी जाएगी। डिप्टी कमिश्नर ने यह भी आदेश दिए कि खनन केवल स्वीकृत क्षेत्रफल और निर्धारित गहराई तक ही किया जाए। साइट्स पर स्थायी सीमा पिलर लगाए जाएंगे और उनके जीपीएस निर्देशांक मैप किए जाएंगे। संबंधित उपमंडल मजिस्ट्रेट अपने अधिकार क्षेत्र की साइटों पर जाकर इन पिलरों का व्यक्तिगत सत्यापन करेंगे।प्रत्येक साइट पर ठेकेदार का पूरा विवरण, रकबा, मंजूरी की समयावधि और काम के घंटों की जानकारी वाला एक बड़ा डिस्प्ले बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा।
सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही होगी माइनिंग, रात में ड्रोन से होगी निगरानी :-
कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए समय-सीमा निर्धारित करते हुए डीसी ने निर्देश दिए कि खनन की अनुमति केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही मान्य होगी। सूर्यास्त के बाद लोडेड ट्रकों को ग्रामीण लिंक सड़कों से होकर नेशनल या स्टेट हाईवे तक पहुंचने के लिए अधिकतम केवल एक घंटे की छूट दी जाएगी। निर्धारित समय बीतने के बाद लिंक सड़कों पर किसी भी खनन वाहन की आवाजाही पर पूर्ण रोक रहेगी। पुलिस कमिश्नर लुधियाना तथा एसएसपी लुधियाना देहाती व खन्ना को इन समय-सीमाओं का कड़ाई से पालन करवाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, अवैध खनन रोकने के लिए साइट्स के मुख्य प्रवेश-निकास द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और निगरानी के लिए नाइट-विजन ड्रोन तैनात करने पर भी विचार किया जा रहा है। डिप्टी कमिश्नर ने सभी संबंधित विभागों को इन निर्देशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का हुक्म दिया और दोहराया कि नियमों की अवहेलना करने वालों से कोई रियायत नहीं बरती जाएगी।