Edited By Urmila,Updated: 12 Sep, 2026 02:26 PM

जालंधर में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए केंद्र सरकार से मिले करोड़ों रुपए के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जालंधर : जालंधर में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए केंद्र सरकार से मिले करोड़ों रुपए के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत नगर निगम को मिले 16.08 करोड़ रुपए से शहर में 148 विकास कार्य करवाए गए। इनमें सड़क निर्माण, सड़कों की मरम्मत, फुटपाथ, इंटरलॉकिंग टाइलें और गलियों से जुड़े काम शामिल हैं।
हालांकि NCAP फंड का मुख्य उद्देश्य शहर में वायु प्रदूषण को कम करना था। इसके तहत ऑटोमैटिक AQI मॉनिटरिंग स्टेशन, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, ग्रीन बेल्ट, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग और प्रदूषण कम करने वाले दूसरे उपायों पर फंड खर्च किया जाना था। ऐसे में सामान्य विकास कार्यों पर इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद अब इसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
चारों इलाकों में करोड़ों रुपए खर्च
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, जालंधर वेस्ट में 52 कामों पर 6.25 करोड़ रुपए, जालंधर सेंट्रल में 58 कामों पर 5.54 करोड़ रुपए, नॉर्थ में 21 कामों पर 2.49 करोड़ रुपए और कैंट इलाके में 17 कामों पर 1.81 करोड़ रुपए खर्च किए गए। यानी NCAP के तहत मिली पूरी राशि का इस्तेमाल शहर के अलग-अलग हिस्सों में कुल 148 कामों पर किया गया। इनमें ज्यादातर काम सड़क और आसपास के सिविल डेवलपमेंट से जुड़े बताए गए हैं।
प्रदूषण घटाने वाली सुविधाएं अभी भी सवालों के घेरे में
दूसरी तरफ, शहर में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जरूरी कई व्यवस्थाएं अभी भी पर्याप्त नहीं हैं। जालंधर में मैकेनिकल रोड स्वीपिंग के लिए पर्याप्त मशीनरी नहीं है और EV चार्जिंग नेटवर्क भी मौजूद नहीं है। ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कुछ प्रोजेक्ट भी अभी अधूरे बताए जा रहे हैं।
सबसे अहम बात यह है कि उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जालंधर में PM10 का स्तर निर्धारित मानक से दोगुने से भी ज्यादा बना हुआ है। ऐसे में सवाल यह है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए मिले फंड से हुए कामों का हवा की गुणवत्ता पर कितना वास्तविक असर पड़ा।
सर्वे में जालंधर 37वें स्थान पर
नेशनल क्लीन एयर सर्वे में 3 से 10 लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में जालंधर को 37वां स्थान मिला है। रैंकिंग और शहर में प्रदूषण की मौजूदा स्थिति को देखते हुए NCAP फंड के इस्तेमाल की प्राथमिकताओं पर चर्चा शुरू हो गई है।
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