Edited By Urmila,Updated: 21 Jan, 2026 12:40 PM

पंजाब की राजनीति में अप्रैल 2026 से धमाके होने शुरू हो जाएंगे और दबाव की राजनीति दम तोड़ जाएगी।
जालंधर/चंडीगढ़ (विशेष) : पंजाब की राजनीति में अप्रैल 2026 से धमाके होने शुरू हो जाएंगे और दबाव की राजनीति दम तोड़ जाएगी। पंजाब विधानसभा के आम चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में होने हैं और जैसे-जैसे पंजाब चुनावों की तरफ बढ़ता जाएगा वैसे-वैसे सत्ताधारी दल के अंदर भी सुगबुगाहट बढ़ती जाएगी। चुनाव जैसे-जैसे निकट आते हैं वैसे-वैसे निर्वाचित प्रतिनिधियों के अंदर पुन: निर्वाचित होने की भावना भी बढ़ती जाती है। ऐसी स्थिति में एक तो दल बदली का दौर राजनीति में शुरू हो जाएगा।
पंजाब में वैसे भी इस समय कई राजनीतिक पार्टियां मैदान में हैं इसलिए निर्वाचित विधायकों के सामने भी कई तरह के विकल्प होते हैं। उसे देखते हुए दल-बदलू का दौर ज्यादा गर्मा जाता है। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी भी अगले चुनाव में अपने 50-60 मौजूदा विधायकों को तबदील करने का विचार रखती है। ऐसी स्थिति में दल बदलू का दौर ज्यादा प्रभावी दिखाई देगा क्योंकि जिन विधायकों को पुन: टिकट न मिलने का विचार होगा वह पार्टियों को छोड़ेंगे। चुनाव निकट आने पर सरकारी पद हासिल करने की लालसा भी कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में बगावत भी पार्टियों में बढ़ जाएगी। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह रहेगी कि सत्ताधारी दल से संबंध रखते मंत्रियों व बोर्डों व कार्पोरेशनों पर तैनात जन प्रतिनिधियों के ऊपर दबाव कम हो जाएगा। ऐसी स्थिति में वह हाईकमान की भी परवाह नहीं करेंगे।
वास्तव में पंजाब की राजनीति आने वाले दिनों में दिलचस्प दौर में प्रवेश करने वाली है। पंजाबी इसका खूब लुत्फ उठाते हुए दिखाई देंगे और राजनीति चर्चाएं लगातार पंजाब के राजनीतिक पटल पर चलती हुई दिखाई देंगी। अभी तो कई मंत्रियों व विधायकों पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव चल रहा होता है तो धीरे-धीरे खत्म होता जाएगा। वैसे भी कई मंत्री निजी बातचीत में कहते हैं कि पिछले 4 वर्षों में तो उनकी इच्छा से पंजाब में कोई काम हुए ही नहीं। उन्हें तो रिमोट कंट्रोल से संचालित किया जा रहा था। यहां तक तो कुछ मंत्री तो यह भी कहते हैं कि वह अपने विभाग में बदलियां करने में भी समर्थ नहीं थे।
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