निजी स्कूलों में वर्दी-किताबों की बिक्री पर तत्काल रोक

Edited By Mohit,Updated: 15 Jun, 2019 07:25 PM

private school

पंजाब में स्कूलों में ही वर्दियों और किताबों की बिक्री करने वाले और बच्चों के अभिभावकों का आर्थिक शोषण करने वाले निजी स्कूल संचालकों पर बड़ी गाज गिरी है।

चंडीगढ़ः पंजाब में स्कूलों में ही वर्दियों और किताबों की बिक्री करने वाले और बच्चों के अभिभावकों का आर्थिक शोषण करने वाले निजी स्कूल संचालकों पर बड़ी गाज गिरी है। राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से इन वस्तुओं की स्कूलों में बिक्री करने पर रोक लगा दी है। यहां तक कि स्कूल संचालक अभिभावकों को सुझाई गई दुकान से वर्दियां और किताबें खरीदनें के लिए भी मजबूर नहीं कर सकेंगे। 

राज्य के शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला ने स्कूलों द्वारा बच्चों के अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने सम्बंधी शिकायतों का संज्ञान लेते हुए सीबीएसई और आईसीएसई तथा राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को ये निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी निजी स्कूल कम से कम तीन वर्ष तक वर्दी के रंग और डिजाइन में बदलाव नहीं करेगा। स्कूल अब वर्दी का रंग, डिज़ाइन, कपड़ा आदि की समस्त जानकारी स्कूल की वैबसाईट पर अपलोड करेंगे ताकि अभिभावक किसी भी जगह से इसे खरीद और सिलवा सकें। 

उन्होंने स्कूल प्रबंधन के लिए यह अनिवार्य किया है कि वे अपने स्कूलों में बोर्ड के सलेबस के अनुसार ही किताबों का इस्तेमाल करें। ऐसी सभी किताबों की सूची भी स्कूल की वैबसाईट पर अपलोड की जाए ताकि अभिभावक इसे अपनी सुविधा अनुसार किसी भी जगह से खरीद सकें। उन्होंने कहा कि अक्सर स्कूल अभिभावकों को सलेबस में परिवर्तन की बात कह उन्हें प्राईवेट प्रकाशकों की नई किताबें खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसे में अभिभावक पुरानी किताबें भी नहीं। जबकि हकीकत में सलेबस में कोई परिवर्तन नहीं होता है और यह सब स्कूलों द्वारा मोटी कमाई करने के लिए किया जाता है। ऐसे में इस धोखाधड़ी पर लगाम लगाने की जरूरत है। 

सिंगला ने सभी स्कूलों को इन निर्देशों का एक हफ्ते में पालन करने को कहा है। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों की वेबसाईट नहीं है वे जल्द से जल्द इसे तैयार करा लें तथा किताबों और वर्दियों से सम्बन्धित सारी जानकारी इस पर अपलोड करें। इस सम्बंध में सम्बन्धी किसी किस्म की कोई कोताही या बहाना बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों की अचानक जांच भी की जाएगी और अगर कोई स्कूल इनकी अवहेलना करता पाया जाता है तो उसका लाईसेंस रद्द कर दिया जाएगा।

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