फगवाड़ा सिविल अस्पताल में बड़ी लापरवाही, मोर्चरी का फ्रीजर खराब होने से शव हुआ खराब

Edited By Kalash,Updated: 20 Jul, 2026 12:10 PM

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फगवाड़ा सिविल अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया हैं। अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ की कथित घोर लापरवाही के कारण मोर्चरी (शवगृह) में रखी गई एक मृतदेह पूरी तरह से खराब हो जाने की सनसनीखेज सूचना मिली हैं।

फगवाड़ा (जलोटा): फगवाड़ा सिविल अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया हैं। अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ की कथित घोर लापरवाही के कारण मोर्चरी (शवगृह) में रखी गई एक मृतदेह पूरी तरह से खराब हो जाने की सनसनीखेज सूचना मिली हैं। मृतक के परिजनों और सहकर्मियों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा लगाए जा रहे सभी आरोपों को गलत करार दिया जा रहा हैं। परिजनों का कहना हैं कि मोर्चरी का फ्रीजर बंद होने की वजह से शव इस कदर सूज गया और विकृत हो गया कि उसे पहचानना तक नामुमकिन हो गया।

इस घटना के बाद से मृतक के परिवार और स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग तथा अस्पताल प्रशासन के खिलाफ भारी रोष देखा जा रहा हैं। पीड़ित परिवार ने पंजाब सरकार और उच्च अधिकारियों से इस लापरवाही के जिम्मेदार स्टाफ के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने और न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। जानकारी अनुसार मृतक की पहचान उदय यादव के रूप में हुई है जो फगवाड़ा के एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) गोदाम में कार्यरत थे। बीते 17 जुलाई को काम के दौरान अत्यधिक गर्मी और अचानक तबीयत बिगड़ने (संभावित दिल का दौरा पड़ने) के कारण रहस्यमय हालात में उनकी मौत हो गई थी। चूंकि उदय यादव का मूल परिवार उत्तर प्रदेश के बनारस का रहने वाला हैं और उन्हें वहां से पंजाब पहुंचने में समय लगना था।

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परिजनों ने शव को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से 17 जुलाई को ही फगवाड़ा के सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया था। परिजनों का मानना था कि सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में शव पूरी तरह सुरक्षित रहेगा, लेकिन अस्पताल की बदइंतजामी ने उनके घावों पर नमक छिड़कने का काम किया। मृतक के भतीजे ने भर्राए गले से बताया कि जब वे रविवार सुबह करीब 9 बजे अपने बनारस से आए रिश्तेदारों के साथ शव को लेने अस्पताल पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। मोर्चरी से बाहर निकाली गई उदय यादव की पार्थिव देह पूरी तरह से खराब हो चुकी थी। शव पर भारी सूजन आ चुकी थी और चेहरा इस हद तक विकृत हो चुका था कि परिवार का कोई भी सदस्य उसे पहचान नहीं पा रहा था।

परिजनों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने मोर्चरी के फ्रीजर को हाथ लगाकर देखा तो वह पूरी तरह से गर्म था और उसमें कोई कूलिंग नहीं हो रही थी। परिजनों का कहना है कि जब शव रखवाया गया था तभी से फ्रीजर बंद पड़ा था लेकिन ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने उन्हें गुमराह किया और कहा कि फ्रीजर बिल्कुल ठीक काम कर रहा हैं। घटना से आक्रोशित मृतक के साथियों और परिजनों ने जब अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में तैनात जूनियर डॉक्टर से इस बारे में जवाब मांगा, तो कथित तौर पर डॉक्टरों और स्टाफ ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया। डॉक्टरों ने इस खराबी का ठीकरा अत्यधिक गर्मी पर फोड़ने का प्रयास किया, जिसे परिजनों ने सिरे से खारिज कर दिया।

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परिजनों ने कहा कि अगर फ्रीजर चल रहा होता, तो शव की यह स्थिति कभी नहीं होती। इस पूरे मामले पर पक्ष जानने के लिए जब परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ) को फोन और वीडियो कॉल करने की कोशिश की तो छुट्टी का दिन होने का हवाला देकर उनका फोन तक नहीं उठाया गया। इस अमानवीय घटना को लेकर एफसीआई गोदाम में मृतक के साथ काम करने वाले सहकर्मियों में भी गहरा आक्रोश हैं। सहकर्मियों ने साफ तौर पर कहा कि यह सीधे तौर पर अस्पताल के मोर्चरी प्रभारी और प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही का मामला है। दूर-दराज से आए परिवार के लोग अपने कमाऊ सदस्य को खोने के गम में थे। अस्पताल ने उन्हें आखिरी बार उनका चेहरा तक ठीक से देखने नहीं दिया। पीड़ित पक्ष ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि पंजाब सरकार और स्वास्थ्य प्रशासन ने इस गंभीर लापरवाही के दोषी डॉक्टरों व कर्मचारियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई नहीं की और पीड़ित परिवार को न्याय नही मिला तो वह सब होगा जो समय की मांग बनेगा।

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