Edited By Vatika,Updated: 10 Sep, 2026 12:18 PM

दुर्गा माता मंदिर के सामने स्थित सरकारी कॉलेज (लड़कियां) के ग्राउंड में आयोजित होने वाले बहुचर्चित दशहरा मेले में झूले-चंडोल
लुधियाना (राज) : दुर्गा माता मंदिर के सामने स्थित सरकारी कॉलेज (लड़कियां) के ग्राउंड में आयोजित होने वाले बहुचर्चित दशहरा मेले में झूले-चंडोल लगाने की ओपन बोली को लेकर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ रही है। बिना पारदर्शी बोली लगाए सरकार के एक चहेते ठेकेदार को मेले का जिम्मा सौंपने के आरोपों के बीच अब जिला प्रशासन के अपने ही आधिकारिक आदेशों ने एक बड़े प्रशासनिक झोलझाल की पोल खोल दी है। डीसी कार्यालय के निर्देश पर एसडीएम (पश्चिमी) कार्यालय में 10 सितंबर को होने वाली ओपन बोली के संबंध में महज 24 घंटे के भीतर जारी किए गए है। दोनों आदेशों की प्रतियां सामने आई है, जिसमें अलग-अलग आदेशों में ड्राफ्ट जमा करवाने की अंतिम तथि और समय में अचानक किया गया बदलाव नजर आ रहे है, जोकि सीधे-सीधे किसी अंदरूनी फिक्सिंग और गोलमाल की ओर इशारा कर रहा है।
पहला आदेश (1 सितंबर), बोली वाले दिन 10 सितंबर सुबह 10 बजे तक का था समय
मामले के अनुसार, बिना बोली के ठेका देने की चर्चाओं पर विराम लगाने के लिए डीसी हिमांशु जैन के निर्देश पर एसडीएम पश्चिमी कार्यालय द्वारा 1 सितंबर 2026 को आधिकारिक नोटिस (क्रमांक: 2651-57) जारी किया गया। इस नोटिस में स्पष्ट उल्लेख था कि झूले व चंडोल लगाने के लिए 10 सितंबर 2026 (गुरुवार) को एसडीएम पश्चिमी कार्यालय में खुली बोली करवाई जाएगी। बोली में भाग लेने वाले इच्छुक बोलीदाताओं को 30 लाख की सिक्योरिटी राशि का डिमांड ड्राफ्ट सेक्रेटरी, रेड क्रॉस सोसाइटी, लुधियाना के नाम पर बोली वाले दिन यानी 10 सितंबर को सुबह 10 बजे तक दफ्तर में जमा करवाने की छूट दी गई थी।
दूसरा आदेश (2 सितंबर): 24 घंटे में बदल दी तारीख, 8 सितंबर दोपहर 3 बजे की लगाई शर्त
हैरानी की बात यह रही कि ठीक अगले ही दिन यानी 2 सितंबर 2026 को उसी विषय पर एक और संशोधित आदेश (क्रमांक: 2658-64) जारी कर दिया गया। इस दूसरे आदेश में बोली की तारीख तो 10 सितंबर ही रखी गई, लेकिन सिक्योरिटी ड्राफ्ट जमा करवाने की समय सीमा में नाटकीय मोड़ लाते हुए इसे दो दिन पहले यानी 8 सितंबर दोपहर 3 बजे तक सीमित कर दिया गया। एक ही मेले की बोली के लिए दो दिनों में दो अलग-अलग आदेशों का अस्तित्व में आना और ड्राफ्ट जमा करने की अवधि को पहले खिसकाना इस बात का पुख्ता प्रमाण माना जा रहा है कि आम ठेकेदारों को प्रक्रिया से बाहर रखने की पटकथा रची गई।
ड्राफ्ट लेकर पहुंचे ठेकेदार को लौटाया, डीसी ने दिया सुबह का आश्वासन
मामले में पीडि़त ठेकेदार विपन गोयल ने बताया कि वह 1 सितंबर के अधिकृत आदेश के अनुसार 9 सितंबर को 30 लाख का बैंक ड्राफ्ट जमा करवाने के लिए एसडीएम पश्चिमी के दफ्तर पहुंचे थे। लेकिन एसडीएम पश्चिमी कुलदीप बावा ने यह कहकर ड्राफ्ट लेने से साफ इनकार कर दिया कि समय सीमा समाप्त हो चुकी है और वे देरी से आए हैं। ठेकेदार विपन गोयल के अनुसार जब उन्होंने 1 सितंबर आदेश न्यूज पेपेर में छपने का हवाला दिया, तो अधिकारियों ने न्यूज पेपर में गलती होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद उन्होंने डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा, जहां डीसी ने उन्हें सुबह ड्राफ्ट जमा करवाने का मौखिक आश्वासन दिया।
डी.सी. ने नहीं उठाया फोन, एस.डी.एम. बोले—अब ड्राफ्ट लिया तो बाकी करेंगे हंगामा
इस पूरे प्रशासनिक घालमेल पर जब डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उन्होंने कॉल उठाना मुनासिब नहीं समझा। वहीं दूसरी ओर, एसडीएम पश्चिमी कुलदीप बावा ने 2 सितंबर के दूसरे आदेश का हवाला देते हुए कहा कि आदेशानुसार ड्राफ्ट जमा करने की तारीख और समय (8 सितंबर दोपहर 3 बजे) पहले से तय था। उन्होंने तर्क दिया कि यदि अब समय सीमा बीतने के बाद किसी ठेकेदार का ड्राफ्ट स्वीकार किया जाता है, तो प्रक्रिया में पहले से शामिल अन्य ठेकेदार विरोध और हंगामा कर सकते हैं।
सवालों के घेरे में डीसी दफ्तर, निष्पक्ष बोली का दावा या चहेते की ताजपोशी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब पहला आदेश 1 सितंबर को जारी हो चुका था, तो अचानक 2 सितंबर को ड्राफ्ट की तारीख को 10 सितंबर से घटाकर 8 सितंबर करने की नौबत क्यों आई? क्या यह बदलाव केवल चहेते ठेकेदार की राह के रोड़े हटाने और अन्य प्रतिस्पर्धियों को रेस से बाहर करने के लिए किया गया? अब नजरें डीसी हिमांशु जैन पर टिकी हैं कि क्या वे अपने पारदर्शी व निष्पक्ष नीलामी के दावे पर खरे उतरते हुए सभी को बराबरी का मौका देते हैं या फिर यह बहुचर्चित मेला रसूखदार के पाले में ही डाल दिया जाता है।