नगर निगम बिल्डिंग ब्रांच का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, सरकारी खजाने को भारी चपत

Edited By Kalash,Updated: 12 Sep, 2026 12:36 PM

municipal corporation building branch fraud

नगर निगम लुधियाना की बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों की कथित मिलीभगत, घोर लापरवाही और संदिग्ध कार्यप्रणाली का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है।

लुधियाना (राज): नगर निगम लुधियाना की बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों की कथित मिलीभगत, घोर लापरवाही और संदिग्ध कार्यप्रणाली का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। पंजाब नगर निगम अधिनियम एक्ट, 1976 की धारा 269 और 270 के तहत अवैध निर्माणों और नियमों के उल्लंघन पर जिन डिफॉल्टरों के बाकायदा चालान काटे गए थे, उनसे अधिकारी पिछले करीब 27-28 वर्षों में ₹43 करोड़ से अधिक की पेंडिंग राशि वसूलने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। अफसरों की इस कथित लापरवाही के चलते सरकारी खजाने को सीधे तौर पर करोड़ों रुपये का चूना लगा है। यह सनसनीखेज खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता रोहित सभ्रवाल द्वारा नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध 'बिल्डिंग चालान मैनेजमेंट सिस्टम' के आधिकारिक डेटा की पड़ताल के बाद हुआ है।

आरटीआई कार्यकर्ता रोहित सभ्रवाल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि नगर निगम लुधियाना के पोर्टल के अनुसार वित्तीय वर्ष 1998-99 से लेकर वर्ष 2026-27 तक कुल ₹324.80 करोड़ की चालान राशि असेस की गई थी। इसमें से नगर निगम द्वारा ₹314.22 करोड़ की वसूली तो दिखा दी गई, लेकिन ₹42.99 करोड़ (लगभग 43 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम राशि की वसूली आज भी अधर में लटकी हुई है। धारा 269 और 270 के तहत चालान जारी होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने डिफॉल्टरों से रिकवरी करने के लिए कोई ठोस कानूनी या प्रशासनिक कदम नहीं उठाए, जो सीधे तौर पर ड्यूटी में घोर कोताही को दर्शाता है। हैरानी की बात यह है कि म्युनिसिपल बाय-लॉज में पेंडिंग रिकवरी राशि पर कोई भी ब्याज लगाने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में रिकवरी में हो रही दशकों की देरी के कारण एक तरफ जहां निगम को उसकी मूल राशि नहीं मिल रही, वहीं दूसरी तरफ ब्याज का भी भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

स्थानीय निकाय विभाग के CVO को शिकायत, विजिलेंस जांच की मांग

सरकारी खजाने को पहुंचाए गए इस भारी नुकसान और डिफॉल्टरों को दिए गए कथित संरक्षण के खिलाफ स्थानीय निकाय विभाग पंजाब के चीफ विजिलेंस अफसर को औपचारिक शिकायत भेज दी गई है। रोहित सभ्रवाल ने अपनी शिकायत में मांग की है कि इस पूरे रिकवरी घोटाले की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष विजिलेंस जांच के तुरंत आदेश जारी किए जाएं। वर्ष 1999-2000 से लेकर आज तक बिल्डिंग ब्रांच में तैनात रहे सभी संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों से यह जवाब तलब किया जाए कि आखिर यह भारी राशि वसूलने से क्यों रोकी गई। करोड़ों रुपये की पेंडिंग रिकवरी न करने और सरकारी खजाने को अपूरणीय क्षति पहुंचाने वाले दोषी अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।

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