Edited By Subhash Kapoor,Updated: 17 May, 2026 10:47 PM

पंजाब की सियासत में पंथक एकता को लेकर चल रही कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। अकाली दल (वारिस पंजाब दे) और अकाली दल (पुनर सुरजीत) के बीच गठबंधन और समन्वय वार्ता पूरी तरह टूट गई है। दोनों दलों के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत के बावजूद वैचारिक मतभेद खत्म...
पंजाब डैस्क : पंजाब की सियासत में पंथक एकता को लेकर चल रही कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। अकाली दल (वारिस पंजाब दे) और अकाली दल (पुनर सुरजीत) के बीच गठबंधन और समन्वय वार्ता पूरी तरह टूट गई है। दोनों दलों के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत के बावजूद वैचारिक मतभेद खत्म नहीं हो सके, जिसके चलते एकता की कोशिशें विफल हो गईं।
अकाली दल (वारिस पंजाब दे) की समन्वय समिति के सदस्यों बाबू सिंह बराड़, परमजीत सिंह जोहल, परगट सिंह रैया और रछपाल सिंह सोसन ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि कुछ ऐसे नेताओं को आगे लाया गया, जिन्होंने पंथ का नेतृत्व करने का नैतिक अधिकार खो दिया है। यही गठबंधन टूटने की सबसे बड़ी वजह बनी।
समिति के मुताबिक, 18 अप्रैल को पंथिक एकता के उद्देश्य से आठ सदस्यीय समन्वय समिति बनाई गई थी और कई दौर की बैठकों में साझा रणनीति बनाने की कोशिश हुई। लेकिन अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी।
रछपाल सिंह सोसन ने कहा कि अकाल तख्त द्वारा 2 दिसंबर को जारी निर्देशों के अनुसार यह सहमति बनी थी कि विवादित नेताओं को नेतृत्व से दूर रखा जाएगा। आरोप है कि अकाली दल (पुनर सुरजीत) ने ऐसे नेताओं को अहम जिम्मेदारियां देकर पंथिक भावना को ठेस पहुंचाई। इसके साथ ही वारिस पंजाब दे गुट ने यह भी आरोप लगाया कि पुनर सुरजीत नेतृत्व की ओर से लगातार गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए गए, जिससे दोनों दलों के बीच भरोसा कमजोर हुआ और आखिरकार गठबंधन की संभावनाएं खत्म हो गईं।