समराला Civil Hospital की लापरवाही पर मानवाधिकार आयोग सख्त, सिविल सर्जन से Report की तलब

Edited By Kamini,Updated: 28 Jul, 2026 04:19 PM

human rights commission takes suo motu

लुधियाना से एक मानवता शर्मसार करता मामला सामने आया है।

लुधियाना (विक्की) : लुधियाना से एक मानवता शर्मसार करता मामला सामने आया है। समराला के सिविल अस्पताल में अस्पताल प्रशासन की कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आने के बाद पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग एक्शन में है। जानकारी के मुताबिक समराला सिविल अस्पताल के प्रशासन की लापरवाही के कारण एक मृतक का शव करीब डेढ़ घंटे तक मोर्चरी के बाहर खुले में रखने का आरोप है। इस मामले को लेकर आयोग ने स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लिया है। 

इस मामले में आयोग ने लुधियाना के सिविल सर्जन को निर्देश दिए हैं कि, सुनवाई की अगली तारीख (20.8.2026) से  पहले पूरी रिपोर्ट सौंपी जाए। आयोग ने Suo Motu लेते हुए सुनवाई की अगली तारीख से एक सप्ताह पहले लुधियाना के सिविल सर्जन रिपोर्ट तलब करें। आयोग के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति संत प्रकाश, सदस्य न्यायमूर्ति गुरबीर सिंह और सदस्य जितेंद्र सिंह शंटी (पद्मश्री) की पीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए लुधियाना के सिविल सर्जन को नोटिस जारी किया है। अस्पताल के कर्मचारियों की कथित उदासीनता के कारण एक मृतक का शव डेढ़ घंटे तक मुर्दाघर के बाहर खुले में पड़ा रहा। आयोग ने सिविल सर्जन, लुधियाना को निर्देश दिए हैं कि मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले, यानी 20 अगस्त 2026 से पूर्व आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाए। मानवाधिकार आयोग ने संकेत दिया है कि रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पूरा मामला

आपको बता दे कि, लुधियाना के समराला के सिविल अस्पताल से एक शर्मसार करती खबर सामने आई थी। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और स्टाफ की बेरुखी के कारण एक मृतक व्यक्ति का शव डेढ़ घंटे तक मोर्चरी के बाहर खुले में पड़ा रहा। मृतक व्यक्ति पहचान जूना पांडे निवासी हिम्मत नगर समराला के रूप में हुई। किन्ही कारण के चलते जूना पांडे की मौत हो गई, जिसके चलते परिवार वाले उसके शव को पोस्टमार्ट के लिए सिविल अस्पताल लेकर आए थे। लेकिन इस दौरान मृतक के शव को मोर्चरी में रखने का बजाय बाहर खुले आसमान के नीचे छोड़ दिया गया। इस मामले को लेकर मृतक के परिवार वालों द्वारा भी बयान देने से मना कर दिया गया। लेकिन सीविल अस्पताल की लापरवाही से साबित करती है कि प्रशासन और स्टाफ में कोई इंसानियत नहीं है।

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