लाइनमैन भर्ती विवाद पर हाईकोर्ट ने अभ्यार्थियों को दिया झटका, पढ़ें पूरी खबर

Edited By Vatika,Updated: 01 Mar, 2026 08:29 AM

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करीब डेढ़ दशक पुराने पंजाब स्टेट पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (पी.एस.पी.सी.एल.)

चंडीगढ़: करीब डेढ़ दशक पुराने पंजाब स्टेट पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (पी.एस.पी.सी.एल.) की लाइनमैन भर्ती विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए नियुक्ति की मांग कर रहे अभ्यर्थियों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया में शामिल होना या मैरिट सूची में स्थान प्राप्त कर लेना किसी उम्मीदवार को नियुक्ति का वैधानिक अधिकार प्रदान नहीं करता।

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने कई याचिकाओं पर संयुक्त निर्णय सुनाते हुए कहा कि वर्ष 2011 में जारी विज्ञापन के तहत भर्ती को कंवल 1000 पदों तक सीमित माना जाएगा और शेष पद भविष्य की रिक्तियां मानी जाएंगी। अदालत ने सभी दावों को निराधार ठहराया। अदालत के समक्ष पचिकाकर्ताओं का वर्क था कि जनवरी, 2011 में लगभग 5000 लाइनमैन पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे और उन्होंन चयन प्रक्रिया में सफलतापूर्वक भाग लिया था, लेकिन लंबित जनहित याचिका के कारण नियुक्तियां रोक दी गई। बाद में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा शेष पदों की भर्ती रद्द कर दी गई, जिससे उनके अधिकार प्रभावित हुए। हालांकि हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि पूर्व में दायर जनहित पाचिका के दौरान अदालत ने केवल 1000 पद भरने की अनुमति दी थी। 

इसके बाद उत्पन्न होने वाली रिक्तियां नई भर्ती के माध्यम से ही भरी जानी थीं। अदालत ने माना कि भविष्य की रिक्तियों को पुराने विज्ञापन के आधार पर भरना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत अन्य पात्र उम्मीदवारों के अधिकारों का उल्लंघन होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि आयु सीमा में दी गई छूट केवल उम्मीदवारों को आगामी भर्तियों में भाग लेने का अवसर दन के लिए थी. इस नियुक्ति का अधिकार नहीं माना जा सकता। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता किसी भी प्रकार का योग्य कानूनी अधिकार स्थापित करने में विफल रहे हैं। 
 

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