Edited By Kalash,Updated: 12 Jan, 2026 05:22 PM

स्वास्थ्य विभाग ने प्रसव मृत्यु दर के संबंध में सख्त रुख अपनाया है।
अमृतसर (दलजीत): स्वास्थ्य विभाग ने प्रसव मृत्यु दर के संबंध में सख्त रुख अपनाया है। अमृतसर जिले में जच्चा मृत्यु के मामलों में वृद्धि के बाद विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों, सी.एच.सी. और पी.एच.सी. प्रशासकों को स्पष्ट कर दिया है कि गर्भावस्था और प्रसव के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राष्ट्रीय औसत से भी बदतर स्थिति
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में प्रसव मृत्यु दर औसतन लगभग 90 (प्रति एक लाख जीवित जन्म) है, जबकि अमृतसर में यह आंकड़ा 120 से 130 तक पहुंच गया है। यह न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय औसत (88) से भी काफी अधिक है। समीक्षा से पता चला है कि समय पर रेफर न करना और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान करने में विफलता मृत्यु के मुख्य कारण हैं।
लापरवाही पर होगी विभागीय कार्रवाई
विभाग का मानना है कि यदि समय रहते खामियों को दूर कर लिया जाता, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। अब, यदि जांच के दौरान कर्मचारियों की लापरवाही साबित होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे सख्त कदम उठाए जाएंगे।
निगरानी प्रणाली होगी मजबूत
सिविल सर्जन कार्यालय को निर्देश दिया गया है कि प्रसव के बाद कम से कम 48 घंटों तक अस्पतालों में मां की स्थिति की विशेष निगरानी सुनिश्चित की जाए। ब्लड प्रैशर, हीमोग्लोबिन और शुगर जैसे टैस्ट समय पर किए जाने चाहिए और जोखिम वाले मामलों को तुरंत बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाना चाहिए।
लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए : लाली, राजू
सामाजिक कार्यकर्त्ता जय गोपाल लाली व राजिंदर शर्मा राजू ने कहा कि ये आंकड़े बेहद निराशाजनक हैं। उन्होंने मांग की कि प्रसव के दौरान लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अमृतसर में ये आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं, जिसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।
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