प्री-मानसून बारिश से मंड इलाके पर फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, चिंता में लोग

Edited By Vatika,Updated: 13 Jul, 2026 04:10 PM

flood threat looms over the mand region again

पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार और रुक-रुक कर हो रही भारी प्री-मानसून बारिश ने ब्यास नदी के ज़रिए

सुल्तानपुर लोधी: पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार और रुक-रुक कर हो रही भारी प्री-मानसून बारिश ने ब्यास नदी के ज़रिए तबाही मचाना शुरू कर दिया है, जो सुल्तानपुर लोधी विधानसभा के मंड इलाके को अपनी चपेट में ले रही है, जिसकी वजह से इस बार भी मंड इलाके में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि मानसून का मौसम अभी पूरे ज़ोरों पर नहीं आया है। लेकिन नदी पहले ही कई घरों और कीमती ज़मीनों को अपनी चपेट में ले चुकी है।

निहंग मिल्खा सिंह का बचा हुआ घर भी दरिया में बहा
गौरतलब है कि 2025 में सुल्तानपुर लोधी विधानसभा के मंड इलाके के रामपुर गोरा गांव में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। जिसमें करीब 20 घर नदी में डूब गए थे और हज़ारों एकड़ खेती की ज़मीन और फसलें भी बह गई थीं। इससे पहले 2019 और 2023 में भी इस विधान सभा क्षेत्र में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ था। अब ब्यास नदी में बढ़ते जलस्तर के कारण निहंग मिल्खा सिंह का बचा हुआ घर भी दरिया में बह गया है, जिससे लाखों की लागत से बना घर मलबे के ढेर में बदल गया है। खालसा निहंग मिल्खा सिंह के सिर से छत भी उठ गई है, जिसके कारण यह प्रभावित परिवार अब अपना गुज़ारा करने के लिए बाबा बिधि चंद जी के डेरा सुल्तानपुर लोधी में रहने को मजबूर है। प्रभावित परिवार के निहंग मिल्खा सिंह ने आंसू बहाते हुए कहा कि 2025 की बाढ़ के जखन भी अभी बाकी है और अब ऐसा लगता है कि 2026 में भी कुछ नहीं बचेगा। 2025 में आई बाढ़ ने इस घर के साथ लगते 9 और घरों को तबाह कर दिया था और सिर्फ़ यही एक घर बचा था, जिसे भारी बारिश के कारण बहुत नुकसान हुआ है।

दुख की इस घड़ी में अचानक एक ऐसा पल आया जब निहंग मिल्खा सिंह अपनी दुख भरी कहानी सुनाते हुए नाव से उतरते समय अपना बैलेंस खो बैठे और नाव में आ रहे निहंग सिंह और समाजसेवी दिलबाग सिंह गिल ने उन्हें नदी में बहने से बचा लिया। पीड़ित परिवार का कहना है कि पिछले साल आई बाढ़ को एक साल हो गया है, लेकिन उन्हें अभी तक सरकार की तरफ से कोई सही मदद या मुआवजा नहीं मिला है। जिन लोगों की रजिस्टर्ड जमीन, घर और प्रॉपर्टी नदी में बह गई, वे आज भी इंसाफ और राहत का इंतजार कर रहे हैं। अभी भी ब्यास दरिया लगातार उफान पर है और कई दूसरे घरों को खतरा है। अगर आने वाले दिनों में मानसून में और बारिश हुई तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।

क्या कहना है निहंग मिल्खा सिंह और लोगों का-
इस बारे में बात करते हुए निहंग मिल्खा सिंह, निहंग लक्खा सिंह, समाजसेवी दिलबाग सिंह गिल का कहना है कि सरकार और प्रशासन को इस परिवार की तुरंत मदद करने की जरूरत है क्योंकि इस घर समेत कई दूसरे घर पहले ही बाढ़ की वजह से अपने घर, फसल और जमीन खो चुके हैं। निहंग मिल्खा सिंह ने सरकार और प्रशासन पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि अब तक सरकार और प्रशासन ने न तो पहले कोई मुआवजा दिया है और न ही अब। जो सरकार पहले मुर्गियों और बकरियों के लिए मुआवजा देने के बड़े-बड़े दावे करती थी, वह खोखली साबित हुई है। यह सरकार किसानों को मुआवजा देने में पूरी तरह फेल साबित हुई है।

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