Edited By Subhash Kapoor,Updated: 29 Oct, 2026 05:39 PM

ड्रीम सिटी परियोजना में फ्लैट का कब्जा देने में नाकाम रहने पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, लुधियाना ने फीनिक्स इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और उसके दो निदेशकों को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने 66 वर्षीय शिकायतकर्ता द्वारा जमा कराए गए 32,05,634 रुपये 12...
लुधियाना (मेहरा): ड्रीम सिटी परियोजना में फ्लैट का कब्जा देने में नाकाम रहने पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, लुधियाना ने फीनिक्स इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और उसके दो निदेशकों को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने 66 वर्षीय शिकायतकर्ता द्वारा जमा कराए गए 32,05,634 रुपये 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने और कुल 50 हजार रुपये हर्जाना अदा करने का आदेश दिया है। आदेश के तहत कंपनी और उसके दोनों निदेशक भुगतान के लिए संयुक्त रूप से और व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
आयोग के अध्यक्ष संजीव बत्रा और सदस्य मोनिका भगत ने जिला फतेहगढ़ साहिब निवासी मेजर सिंह सेखों की शिकायत पर यह फैसला सुनाया। शिकायतकर्ता ने ड्रीम सिटी परियोजना के ब्लॉक-एन में 1,350 वर्ग फुट का भूतल फ्लैट बुक कराया था, लेकिन पूरी प्रक्रिया के बावजूद उन्हें निर्धारित समय में कब्जा नहीं मिल सका।
शिकायत के मुताबिक, सेखों ने 27 दिसंबर, 2012 को 1.55 लाख रुपये देकर फ्लैट बुक कराया था। इसके बाद 21 मई, 2014 को हुए समझौते में फ्लैट की कुल कीमत 33.04 लाख रुपये तय की गई। शिकायतकर्ता ने विभिन्न किस्तों में 32,05,634 रुपये जमा कराए, जिनमें अगस्त 2014 में चेक के माध्यम से अदा किए गए 10 लाख रुपये भी शामिल थे।
समझौते के तहत बिल्डर को 24 महीने के भीतर फ्लैट का कब्जा देना था। इसके अतिरिक्त छह महीने की छूट अवधि भी निर्धारित थी। इसके बावजूद बिल्डर कब्जा देने में विफल रहा। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बार-बार संपर्क करने के बाद भी न तो फ्लैट सौंपा गया और न ही आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। सात नवंबर, 2022 को परियोजना स्थल पर जाने पर वहां निर्माण कार्य भी होता हुआ नहीं मिला। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अपनी जमा पूंजी ब्याज सहित वापस दिलाने और मुआवजे की मांग को लेकर आयोग का दरवाजा खटखटाया।
नोटिस के बावजूद पेश नहीं हुए बिल्डर के निदेशक
मामले की सुनवाई के दौरान फीनिक्स इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड तथा उसके निदेशक प्रणव पुरी और सुशील पुरी नोटिस जारी होने के बावजूद आयोग के समक्ष पेश नहीं हुए। इसके चलते आयोग ने उनके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की। वहीं, एआईपीएल अंबुजा हाउसिंग एंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसके प्रबंध निदेशक ने दलील दी कि शिकायतकर्ता के साथ उनका कोई समझौता नहीं हुआ था और न ही उन्होंने फ्लैट के लिए कोई रकम प्राप्त की थी।
एकतरफा शर्तों को उपभोक्ता पर नहीं थोपा जा सकता
आयोग ने फैसले में समझौते की शर्तों को बिल्डर के पक्ष में एकतरफा बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय के पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड बनाम गोविंदन राघवन मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि अनुचित और एकतरफा शर्तें उपभोक्ता पर बाध्यकारी नहीं हो सकतीं तथा निर्धारित समय में फ्लैट का कब्जा नहीं देना सेवा में कमी है।
आयोग ने माना कि फीनिक्स इंफ्रा और उसके निदेशकों ने अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया और अनुचित व्यापार व्यवहार अपनाया। इसी आधार पर जमा राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने तथा 50 हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश सुनाया गया। हालांकि, एआईपीएल अंबुजा हाउसिंग एंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसके प्रबंध निदेशक के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी गई।