Edited By Vatika,Updated: 20 Jul, 2026 02:08 PM

जिला अमृतसर में टी.बी. का रोग लगातार अपने पैर पसारता जा रहा है जिसने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
अमृतसर (दलजीत) : जिला अमृतसर में टी.बी. का रोग लगातार अपने पैर पसारता जा रहा है जिसने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय और स्वास्थ्य विभाग पंजाब के संयुक्त प्रयास के तहत जिले के 194 गांवों में करवाए गए 100 दिनों के व्यापक सर्वेक्षण के दौरान 2139 मरीज टी.बी. से पीड़ित पाए गए हैं। सामने आए आंकड़ों के मुताबिक इनमें 1113 पुरुष, 1026 महिलाएं और 280 बच्चे शामिल हैं, जो इस बीमारी के व्यापक प्रभाव को दर्शाते हैं।
जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा इन 194 गांवों को हाई रिस्क क्षेत्र घोषित करते हुए विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान 500 से अधिक टीमों को मैदान में उतारा गया, जिन्होंने घर-घर जाकर लोगों की जांच की। सर्वेक्षण के दौरान कुल 30,074 लोगों की स्क्रीनिंग की गई जिनमें से 13,143 लोगों के एक्स-रे किए गए जबकि लगभग 5500 लोगों की विस्तृत जांच की गई। विभाग के अनुसार टी.बी. एक संक्रामक और खतरनाक बीमारी है, जिसका समय पर इलाज न होने की स्थिति में यह जानलेवा साबित हो सकती है। अमृतसर में हर साल लगभग 160 के करीब मरीज इस बीमारी के कारण अपनी जान गंवा बैठते हैं जोकि एक गंभीर चेतावनी है। मौजूदा समय में जिले में करीब 5 हजार मरीज टी.बी. की दवा ले रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सरकारी और प्राइवेट दोनों केंद्रों पर मुफ्त दवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में टी.बी. मरीजों का मुफ्त इलाज भी सुनिश्चित किया गया है।
टी.बी. के लक्षणों के बारे में विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक खांसी रहना, खून वाली खांसी, बुखार, वजन घटना, रात को पसीना आना और थकान महसूस करना इसके मुख्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए। विभाग का दावा है कि टी.बी. का इलाज पूरी तरह संभव है लेकिन मरीज को निर्धारित समय तक दवा लेना बहुत जरूरी है। अधूरा इलाज करने से बीमारी और खतरनाक रूप धारण कर सकती है और दवाओं का असर भी कम हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी मरीजों को मुफ्त टैस्टिंग, दवा, काउंसलिंग और पोषण सहायता मुहैया करवाई जा रही है। पिछले समय के दौरान मरीजों को मुफ्त डाइट किटें भी बांटी गई हैं ताकि वे अपने स्वास्थ्य में तेजी से सुधार कर सकें।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है अभियान : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डाक्टर रश्मी विज के अनुसार "स्वास्थ्य विभाग द्वारा युद्ध स्तर पर अभियान चलाया गया है। 500 से अधिक टीमों ने घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की है। लोगों से अपील है कि लक्षण नजर आने पर छिपाने की बजाय तुरंत जांच करवाएं।" सिविल सर्जन ने बताया कि जो मरीज पॉजिटिव आता है, उसका दवा चलने के कोर्स तक लगातार स्वास्थ्य विभाग की टीमें फॉलोअप करती हैं, इसके अलावा मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए अधिकारियों द्वारा भी लगातार मॉनिटरिंग की जाती है।
हवा के जरिए फैलने वाली बीमारी है टी.बी. : डा. चावला
स्वास्थ्य विभाग के छाती रोग विशेषज्ञ डा. नरेश चावला के अनुसार "टी.बी. एक हवा के जरिए फैलने वाली बीमारी है। मरीज के संपर्क में आने वालों को भी टैस्ट करवाना चाहिए। इलाज अधूरा छोड़ना सबसे बड़ी गलती है।" डॉक्टर नरेश के अनुसार लोगों को जागरूक रहना चाहिए और स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन का पालन करते हुए मुफ्त में मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेना चाहिए। दो हफ्ते से पुरानी खांसी टी.बी. हो सकती है तुरंत सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच करवानी चाहिए।
टी.बी. खतरनाक बीमारी, इलाज से हो सकती है पूरी तरह से ठीक : जिला टी.बी. अधिकारी
जिला टी.बी. अधिकारी डॉक्टर विजय गोतवाल के अनुसार "टी.बी. खतरनाक बीमारी है लेकिन पूरी तरह ठीक हो सकती है, यदि मरीज समय पर टैस्ट करवाकर पूरा कोर्स लेता है तो वह सेहतमंद जीवन जी सकता है। हमारा लक्ष्य है कि हर मरीज तक इलाज पहुंचे और बीमारी को जड़ से खत्म किया जाए।" डॉक्टर गोतवाल ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में बीमारी की रोकथाम और मरीजों के इलाज के लिए मुफ्त दवा उपलब्ध करवाई जा रही है।
आशा वर्करों के लिए प्रोत्साहन योजना
सर्वेक्षण को कामयाब बनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आशा वर्करों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना भी चलाई गई। जिसके तहत पॉजिटिव मरीज की पहचान करने वाली आशा वर्कर को प्रति मरीज 500 रुपए दिए जाते हैं। इसके अलावा गांवों में मोबाइल एक्स-रे मशीनों के जरिए मुफ्त जांच भी की गई।