Ludhiana: दशहरा मेले की बोली पर बवाल! SDM ऑफिस के बाहर ठेकेदारों का जोरदार हंगामा

Edited By Kamini,Updated: 10 Sep, 2026 01:25 PM

contractors create ruckus outside sdm office

दुर्गा माता मंदिर के सामने स्थित सरकारी कॉलेज (लड़कियां) के ग्राउंड में लगने वाले बहुचर्चित दशहरा मेले में झूले-चंडोल की नीलामी (ओपन बिड) को लेकर चल रहा विवाद गुरुवार को बड़े हंगामे में बदल गया।

लुधियाना (राज): दुर्गा माता मंदिर के सामने स्थित सरकारी कॉलेज (लड़कियां) के ग्राउंड में लगने वाले बहुचर्चित दशहरा मेले में झूले-चंडोल की नीलामी (ओपन बिड) को लेकर चल रहा विवाद गुरुवार को बड़े हंगामे में बदल गया। पहले से ही चहेते ठेकेदार को देने के आरोपों में घिरे प्रशासन के 24 घंटे में बदले 2 अलग-अलग आदेशों की पोल खुलने के बाद गुरुवार सुबह स्थिति बेकाबू हो गई। 

बोली प्रक्रिया में शामिल होने पहुंचे दर्जनों ठेकेदारों ने जब खुद को बाहर किए जाने और केवल एक खास ठेकेदार व उसके आदमियों को अंदर बिठाए जाने का खेल देखा, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित ठेकेदारों ने एसडीएम पश्चिमी कार्यालय के मुख्य गेट पर जमकर हंगामा किया और 'एसडीएम मुर्दाबाद' के नारे लगाते हुए पूरी बोली प्रक्रिया पर धांधली के गंभीर आरोप मढ़े।

गुरुवार सुबह बोली में भाग लेने पहुंचे ठेकेदारों का आरोप था कि एसडीएम कार्यालय द्वारा जानबूझकर उनके ₹30 लाख के सिक्योरिटी ड्राफ्ट और बोली की फाइलें स्वीकार नहीं की गईं। उन्हें दफ्तर के अंदर दाखिल तक नहीं होने दिया गया, जबकि अंदर पर्दे के पीछे केवल सरकार के एक विशेष रसूखदार ठेकेदार और उसके चुनिंदा लोगों को बैठाकर बोली की औपचारिकता पूरी करवाई जा रही थी। प्रशासन के इस पक्षपातपूर्ण रवैये को देखकर ठेकेदारों ने एसडीएम दफ्तर के बाहर धरना देकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। 'एसडीएम मुर्दाबाद' और 'प्रशासनिक धांधली बंद करो' के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

हालात तनावपूर्ण होते देख और बात बिगड़ती देख आखिरकार एसडीएम कुलदीप बावा बैकफुट पर आए। उन्होंने प्रदर्शनकारी ठेकेदारों को अपने कमरे में वार्ता के लिए बुलाया और मामले का हल निकालने के नाम पर उनसे लिखित में शिकायत पत्र देने को कहा। जब मीडिया कर्मियों ने यह पूछा कि अगर 2 सितंबर का ऑर्डर आप ने जारी किया है तो 1 सितंबर वाला ऑर्डर किस ने जारी किया था। इस पर एसडीएम कुलदीप बावा ने गोलमोल जवाब दे दिया। 

अब सवाल यह उठता है कि जब 1 सितंबर को व्यापक स्तर पर ड्राफ्ट जमा करने की अंतिम छूट 10 सितंबर सुबह 10 बजे तक दी गई थी, तो 24 घंटे में इसे घटाकर 8 सितंबर किसके दबाव में किया गया? क्या निष्पक्ष नीलामी का सारा ड्रामा सिर्फ एक चहेते ठेकेदार की झोली में करोड़ों का मेला डालने के लिए रचा गया था? ठेकेदारों के उग्र हंगामे के बाद अब देखना यह होगा कि डीसी प्रशासन इस दागी बोली को रद्द कर दोबारा पारदर्शी प्रक्रिया करवाता है या फिर रसूख के आगे नियमों की बलि चढ़ा दी जाती है।

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