Edited By Kamini,Updated: 02 Mar, 2026 04:01 PM

इंडियन नेशनल कांग्रेस के नेशनल स्पोक्सपर्सन गौतम सेठ ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से ऑफिशियली संपर्क किया है, और मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए तुरंत दखल देने की मांग की है।
पंजाब डेस्क : इंडियन नेशनल कांग्रेस के नेशनल स्पोक्सपर्सन गौतम सेठ ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से ऑफिशियली संपर्क किया है, और मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए तुरंत दखल देने की मांग की है। यह कदम यूएई और खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख नागरिक व विमानन केंद्रों के पास विस्फोटों की खबरों के बाद उठाया गया है।
गौतम सेठ ने खास तौर पर पंजाब के उन हजारों परिवारों की चिंता जताई, जिनके परिजन खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा, “पंजाब का लगभग हर दूसरा घर खाड़ी से जुड़ा है। “पंजाब के हर दूसरे घर का एक दिल का टुकड़ा खाड़ी में है। आज वहां बसे अपनों की सुरक्षा को लेकर परिवारों में भय का माहौल है।” उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा के शांति संबंधी रुख का समर्थन करते हुए कहा कि दुनिया को अनावश्यक युद्ध नहीं, बल्कि शांति की जरूरत है। उन्होंने आगे श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा का ज़िक्र करते हुए कहा, “दुनिया को शांति चाहिए, और बेवजह की लड़ाइयों की नहीं... आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देगी।” गौतम सेठ ने प्रियंका गांधी वाड्रा के कड़े रुख को दोहराया, जिन्होंने हाल ही में "टारगेटेड हत्याओं" और बेगुनाह लोगों की "घिनौनी" हत्या की निंदा की थी।
अपने पत्र में गौतम सेठ ने केंद्र सरकार से केवल एडवाइजरी जारी करने से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाने की अपील की। उन्होंने “ऑपरेशन होमबाउंड” शुरू कर खाड़ी क्षेत्र में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही पंजाब में 24x7 नोडल सपोर्ट डेस्क स्थापित करने का सुझाव दिया, ताकि चिंतित परिवारों को वास्तविक समय में जानकारी मिल सके। सेठ ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के अमेरिका और इजराइल के नेतृत्व से संबंधों का लाभ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा में दिखना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “हमारी कूटनीति की असली ताकत हथियारों से नहीं, बल्कि अपने नागरिकों की सुरक्षा से मापी जानी चाहिए।”
सेठ ने जोर देकर कहा कि US और इजराइल की लीडरशिप के साथ बातचीत करने के बाद, प्रधानमंत्री को अब यह पक्का करना चाहिए कि यह नजदीकी भारतीय लोगों की जान की पूरी सुरक्षा में बदले। उन्होंने आगे कहा, “हमारी डिप्लोमेसी की ताकत हथियारों की ताकत से नहीं, बल्कि हमारे नागरिकों की सुरक्षा से मापी जाती है।”
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