घर बनाना हुआ मुश्किल!  Punjab में 3000 भट्टे बंद होने के कगार पर, जानें कारण

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 13 Mar, 2026 10:53 PM

building a home just got harder

निर्माण कार्य से जुड़े लोगों के लिए इन दिनों हालात लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं। कोयले की कीमतों में अचानक आई भारी वृद्धि का सीधा असर ईंट भट्टा उद्योग पर पड़ा है, जिसके कारण ईंटों के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। हालात यह हैं कि अब घर बनाना आम आदमी के...

बठिंडा (विजय वर्मा): निर्माण कार्य से जुड़े लोगों के लिए इन दिनों हालात लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं। कोयले की कीमतों में अचानक आई भारी वृद्धि का सीधा असर ईंट भट्टा उद्योग पर पड़ा है, जिसके कारण ईंटों के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। हालात यह हैं कि अब घर बनाना आम आदमी के लिए पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है। ईंट भट्टा मालिकों का कहना है कि अगर कोयले की कीमतों पर जल्द नियंत्रण नहीं किया गया तो पंजाब के हजारों भट्टे बंद हो सकते हैं। इससे न केवल निर्माण कार्य प्रभावित होगा बल्कि हजारों मजदूरों की रोज़ी-रोटी पर भी संकट खड़ा हो जाएगा।

कोयले की महंगाई ने बढ़ाई परेशानी
ईंट भट्टा उद्योग का मुख्य आधार कोयला है। भट्टों में ईंट पकाने के लिए बड़ी मात्रा में कोयले की आवश्यकता होती है। लेकिन पिछले कुछ महीनों में कोयले की कीमतों में तेज उछाल आया है। भट्ठा संचालकों के अनुसार जनवरी से मार्च के बीच विदेशी कोयले की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

कोयले की कीमत बढ़ने से ईंटों के उत्पादन की लागत काफी बढ़ गई है। इसका सीधा असर बाजार में ईंटों की कीमत पर पड़ा है। जहां जनवरी महीने में ईंटों का भाव लगभग 6000 रुपये प्रति हजार ईंट था, वहीं अब यह बढ़कर 7500 से 8000 रुपये तक पहुंच गया है।

पंजाब में 3000 से अधिक भट्टे संकट में
पंजाब भट्ठा एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह संधू, महासचिव सुभाष गुप्ता और मीडिया प्रभारी राजेंद्र “राजू भट्ठे वाले” ने बताया कि पूरे पंजाब में करीब 3000 ईंट भट्टे संचालित होते हैं। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इनमें से कई भट्टे बंद होने की कगार पर हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने कोयले की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए तो आने वाले समय में बड़ी संख्या में भट्टों को बंद करना पड़ सकता है। इससे निर्माण कार्य पर व्यापक असर पड़ेगा और रोजगार के अवसर भी कम हो जाएंगे।

बठिंडा में 150 से अधिक भट्टों पर संकट
भट्ठा उद्योग से जुड़े राजेंद्र राजू का कहना है कि अकेले बठिंडा जिले में ही 150 से अधिक ईंट भट्टे हैं, जो इस समय भारी आर्थिक दबाव में काम कर रहे हैं। कई भट्ठा मालिकों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो कई भट्ठा संचालक भट्टे बंद करने को मजबूर हो जाएंगे। इससे जिले में निर्माण कार्य पर बड़ा असर पड़ेगा और ईंटों की उपलब्धता भी कम हो सकती है।

जमीन, मजदूरी और बिजली भी महंगी
भट्ठा संचालकों के अनुसार सिर्फ कोयले की कीमत ही नहीं बढ़ी है, बल्कि अन्य खर्चों में भी भारी वृद्धि हुई है।
जमीन के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे भट्टे चलाना महंगा हो गया है। इसके अलावा मिट्टी की उपलब्धता भी पहले जैसी नहीं रही, क्योंकि कई स्थानों पर मिट्टी निकालने पर पाबंदियां लगी हुई हैं।मजदूरी भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ चुकी है। भट्टों में काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी में वृद्धि होने से उत्पादन लागत और बढ़ गई है। वहीं बिजली के बढ़ते बिलों ने भी भट्ठा मालिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

आम आदमी के सपनों पर असर
ईंटों के दाम बढ़ने का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। पहले ही जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं, ऐसे में घर बनाना कई लोगों के लिए मुश्किल हो चुका है। अब ईंटों के दाम बढ़ने से निर्माण लागत और बढ़ गई है।
निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि मकान बनवाने की लागत पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ चुकी है। सीमेंट, सरिया, रेत और अब ईंटों के दाम बढ़ने से आम परिवारों का घर बनाने का सपना टूटता नजर आ रहा है।

सरकार से राहत की मांग
पंजाब भट्ठा एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि कोयले की कीमतों को नियंत्रित किया जाए और भट्ठा उद्योग को राहत देने के लिए विशेष नीति बनाई जाए। संचालकों का कहना है कि यदि समय रहते सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया तो यह उद्योग धीरे-धीरे दम तोड़ देगा। इससे न केवल निर्माण क्षेत्र प्रभावित होगा बल्कि लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी भी संकट में पड़ जाएगी। भट्ठा संचालकों ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान निकालेगी, ताकि उद्योग को बचाया जा सके और आम लोगों के लिए घर बनाना इतना महंगा न हो।

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