Edited By Subhash Kapoor,Updated: 16 May, 2026 05:24 PM

जिले के गांव गुरुसर सैणेवाला में पुलिस की मौजूदगी में हुई गोलीबारी ने आखिरकार एक जान ले ली। अकाली नेता निर्मल सिंह उर्फ टीटू ने 17 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद शनिवार को निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। उनकी मौत के बाद पूरे इलाके...
बठिंडा, (विजय वर्मा) : जिले के गांव गुरुसर सैणेवाला में पुलिस की मौजूदगी में हुई गोलीबारी ने आखिरकार एक जान ले ली। अकाली नेता निर्मल सिंह उर्फ टीटू ने 17 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद शनिवार को निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। उनकी मौत के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है, जबकि पुलिस की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, निर्मल सिंह टीटू का अपने करीबी रिश्तेदारों के साथ जमीन को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। आरोप है कि 30 अप्रैल को फरीदकोट जिले के कोटकपूरा से पुलिस टीम कुछ सादे कपड़ों में लोगों को साथ लेकर गांव पहुंची। उस समय टीटू खेत में ट्रैक्टर चला रहे थे। इसी दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए और कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया। देखते ही देखते गोलियां चल गईं और एक गोली टीटू के पेट में जा लगी।
घटना के बाद गंभीर हालत में उन्हें बठिंडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतक के पुत्र गोपी ने पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित साजिश बताते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गोपी का कहना है कि एक इंस्पेक्टर और कुछ प्रभावशाली लोगों ने राजनीतिक दबाव में उनके पिता के खिलाफ कोटकपूरा सिटी थाना में झूठा मामला दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस दिन वारदात हुई, उस सुबह रिश्तेदार कई गाड़ियों में हथियारबंद लोगों और पुलिस टीम के साथ घर पहुंचे थे।
गोपी के मुताबिक, हालात बिगड़ते देख उन्होंने तुरंत 112 नंबर पर कॉल की, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। परिवार का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में गोली चली और प्रशासन तमाशबीन बना रहा। उधर, निर्मल सिंह टीटू की मौत के बाद थाना संगत मंडी पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ हत्या की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।