नगर निगम में रिश्वतखोरी का Live खेल: फंड रिलीज करने के बदले घूस लेते कैमरे में कैद हुआ कर्मचारी

Edited By Vatika,Updated: 04 Jun, 2026 09:35 AM

bribery at the municipal corporation

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बातें करने वाले नगर निगम लुधियाना के नाक के नीचे ही रिश्वतखोरी

लुधियाना (राज): भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बातें करने वाले नगर निगम लुधियाना के नाक के नीचे ही रिश्वतखोरी का एक बड़ा खेल चल रहा था, जिसका अब सरेआम भंडाफोड़ हो गया है। नगर निगम के डीसीएफए दफ्तर में तैनात एक सफाई सेवक का रिश्वत लेते हुए लाइव वीडियो सामने आने के बाद पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है। 

विजिलेंस ब्यूरो के पास पहुंची मामले की शिकायत 
आरोप है कि इस शातिर सफाई कर्मी ने डीसी रेट से पक्के हुए एक कर्मचारी का पुराना फंड रिलीज करवाने के नाम पर मोटी रकम की डिमांड की और 10 हजार रुपए रिश्वत डकार ली। इस स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो सोशल मीडिया और उच्च अधिकारियों तक पहुंचते ही नगर निगम कमिश्नर डॉ. नीरू कत्याल गुप्ता ने तुरंत एक्शन लेते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। कमिश्नर ने दो टूक शब्दों में साफ कर दिया है कि अगर वीडियो की सच्चाई साबित हुई, तो आरोपी कर्मचारी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ सबसे सख्त प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस पूरे भ्रष्टाचार के खेल को बेनकाब करने वाले नगर निगम संघर्ष कमेटी के फायर ब्रांड नेता विक्की सहोता ने मामले की कमान अपने हाथ में ली। उन्होंने इस गंभीर मामले की शिकायत न सिर्फ निगम कमिश्नर को दी, बल्कि भ्रष्टाचार निरोधक विंग विजिलेंस ब्यूरो के पास भी सबूतों के साथ लिखित शिकायत दर्ज करवा दी है। दरअसल, पूरा मामला कर्मचारियों की खून-पसीने की कमाई के फंड से जुड़ा है। नगर निगम ने हाल ही में डीसी रेट पर लंबे समय से काम करने वाले कई सफाई सेवकों और सीवरमैनों को पक्का किया था। 

दफ्तर का बाबू 10 हजार रुपए लिए बिना फाइल आगे बढ़ाने को तैयार नहीं
नियमानुसार, डीसी रेट पर काम करने के दौरान इन कर्मचारियों का जो फंड नगर निगम के खाते में जमा था, उसे अब रिलीज किया जा रहा है। इसी का फायदा उठाकर डीसीएफए दफ्तर का यह शातिर मुलाजिम अपनी जेबें गर्म करने में जुट गया और दफ्तर के चक्कर काट रहे सीधे-साधे कर्मचारियों से फंड क्लीयर करने के बदले पैसों की उगाही करने लगा। विक्की सहोता को जब एक पीड़ित कर्मचारी ने आपबीती सुनाई कि दफ्तर का बाबू कई दिनों से चक्कर लगवा रहा है और बिना 10 हजार रुपए लिए फाइल आगे बढ़ाने को तैयार नहीं है, तो संघर्ष कमेटी ने इस रिश्वतखोर को रंगे हाथों दबोचने के लिए एक अचूक जाल बिछाया। रणनीति के तहत पीड़ित कर्मचारी को पैसे देने के बहाने दफ्तर भेजा गया और उसके साथ गए एक अन्य साथी को मोबाइल का खुफिया कैमरा ऑन रखने की जिम्मेदारी दी गई। जैसे ही पीड़ित ने रिश्वतखोर कर्मचारी को नोटों की गड्डी थमाई, वैसे ही कैमरे ने रिश्वतखोरी के इस लाइव खेल को कैद कर लिया। 

आरोपी के खिलाफ तुरंत क्रिमिनल केस दर्ज करने की मांग
स्टिंग ऑपरेशन कामयाब होते ही विक्की सहोता ने इस पुख्ता सबूत को सीधा नगर निगम कमिश्नर के पर्सनल व्हाट्सएप नंबर पर ठोक दिया और मांग की कि ऐसे भ्रष्ट कीड़ों की वजह से पूरे विभाग की साख पर बट्टा लगता है, इसलिए इसे तुरंत बाहर का रास्ता दिखाया जाए। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद नगर निगम संघर्ष कमेटी लुधियाना पंजाब की एक हाई-प्रोफाइल और विशेष बैठक जोन-ए माता रानी चौक स्थित मीटिंग हॉल में बुलाई गई। भ्रष्टाचार के इस मुद्दे और कर्मचारियों की अन्य लंबित मांगों को लेकर हुई इस बैठक में खुद निगम कमिश्नर नीरू कत्याल गुप्ता, ज्वाइंट कमिश्नर विनीत और जोनल कमिश्नर मनप्रीत सिंह विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक में माहौल उस समय बेहद गर्मा गया जब संघर्ष कमेटी के नेताओं ने कमिश्नर के सामने इस 10 हजार रुपए की रिश्वतखोरी के मामले को पुरजोर तरीके से उठाया और आरोपी के खिलाफ तुरंत क्रिमिनल केस दर्ज करने की मांग की। ठोस सबूतों को देखते हुए कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी। साथ ही उन्होंने कर्मचारियों को राहत देते हुए कहा कि उनकी लोकल मांगों से जुड़ी प्रोसीडिंग जल्द ही जारी कर दी जाएगी

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