सफेद दूध, काला कारोबार: लोगों की सेहत से सरेआम खिलवाड़

Edited By Kalash,Updated: 12 Jan, 2026 02:29 PM

adulteration of milk health concern

दूध विश्व के सभी देशों में पाया जाने वाला एक अच्छा भोजन है और यह रोजी-रोटी का भी एक महत्वपूर्ण साधन भी है।

अमृतसर (जशन): दूध विश्व के सभी देशों में पाया जाने वाला एक अच्छा भोजन है और यह रोजी-रोटी का भी एक महत्वपूर्ण साधन भी है। दूध में मानव शरीर के लिए जरूरी सभी तत्व मौजूद होते हैं। इसी के कारण ही इसको संपूर्ण आहार के तौर पर भी जाना जाता है। जब बच्चा जन्म लेता है तो वो केवल दूध के सहारे ही जीवित रहता है और दूध में शामिल पौष्टिक तत्वों के सहारे ही वो पलता बढ़ता है। किसी समय दूध और बेटे को एक अनमोल उपहार माना जाता है। दूध में मिलावट करके बेचना एक समय बहुत बुरा माना जाता था, लेकिन आज ‘सफेद दूध, काला धंधा’ किया जा रहा है। आजकल कई मिलावटखोर लोगों ने अपने आर्थिक फायदे के लिए दूध में कई प्रकार की मिलावटें करके इसकी शुद्धता पर कई प्रकार के प्रश्नचिन्ह अंकित कर दिए हैं। वर्तमान में दूध में मिलावट आम सी ही बात हो गई है।

एफ.ए.ओ संस्था के आंकड़ों पर नज़र दौडाई जाए तो 6 अरब की संख्या से भी ज्यादा लोग डेयरी उत्पादों का उपयोग करते हैं। वहीं डेयरी उत्पादन के व्यवसाय से 1 अरब की संख्या से अधिक लोग इससे जुड़े है और अपने परिवार की जीविका चला रहे है। ऐसे में आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि डेयरी सैक्टर में दूध की खप्त और रोजगार दोनों कितने महत्वपूर्ण हैं।

एक रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्ष 2011 में देश भर से सेहत विभाग द्व‌ारा विभिन्न जगहों से भरे गए दूध के सैपलों में से 70 प्रतिशत सैंपल सही नहीं थे। आसान शब्दों में कहें तो बड़ी संख्या में दूध में मिलावट की जा रही है और लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। दूध में मिलावट के इन आंकड़ों से लोग सदमे में आ गए। गौरतलब है कि ये आंकड़े 2011 के हैं और पंद्रह साल बाद 2026 में दूध में मिलावट का कारोबार इन आंकड़ों से कहीं आगे निकल चुका होगा।

वहीं दूसरी ओर घरों तक दूध पहुंचाने की प्रक्रिया में स्वच्छता का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा जाता है। यहां तक कि जिन बर्तनों में दूध रखा जाता है। उनमें डिटर्जेंट भी ठीक से नहीं धोया जाता है, जो सीधे दूध में मिल जाता है। इसके अलावा दूध में यूरिया, स्टार्च, ग्लूकोज, फॉर्मेलिन और डिटर्जेंट मिलाया जा रहा है। इन सभी पदार्थों को दूध में मिलाया जाता है, ताकि दूध को गाढ़ा बनाया जा सके। यह व्यवसायियों के लिए लाभ बढ़ाने वाला खेल है। ऐसा माना जाता है कि दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए मिलाया जाने वाला पानी आमतौर पर दूषित होता है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है।

कौन सी चीजे मिलाते है मिलावटखोर

दूध में मिलावट करने वाले सिंथैटिक दूध में फेट वैल्यू बढ़ाने के लिए यूरिया मिलाते हैं, जिसके तहत इससे आंतों और पाचन तंत्र पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। वहीं आम तौर पर पेशचूराईड दूध को 4 डिग्री सैल्सियस से कम तापमान पर 48 घंटे तक रखा जा सकता है, लेकिन व्यवसायी दूध को अधिक दिनों तक रखने के लिए इसमें फॉर्मेलिन मिलाते हैं। इससे अंग विफलता (अंगों का फेल होना) हो सकती है। आंतों व पाचन तंत्र पर गंभीर असर डालता है।

दूध में वसा बढ़ाने के लिए गेहूं, मक्का, चावल आदि से प्राप्त स्टार्च को दूध में मिलाया जाता है। इससे दूध की पौष्टिकता कम हो जाती है। इसी प्रकार लैक्टोमीटर पर रीडिंग बढ़ाने के लिए दूध में पानी की मात्रा छुपाने के लिए चीनी मिलाई जाती है। अगर पानी अशुद्ध है तो आप बड़े पैमाने पर फैलने वाली बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। दूसरी ओर लैक्टोमीटर रीडिंग से बचने के लिए पानी वाले दूध में नमक मिलाया जाता है। इससे दूध की पौष्टिकता भी कम हो जाती है।

क्या कहती है मैडिकल रिसर्च की रिपोर्ट
इंडियन कौंसिल ऑफ मैडिकल रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि डिटर्जेंट फूड पॉइजनिंग और आंतों और पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। दूध में मिलावट से हृदय रोग, कैंसर और कभी-कभी मौत भी हो सकती है, यूरिया, कास्टिक सोडा या फॉर्मेलिन की मिलावट वाला दूध पीने से पेट संबंधी समस्याएं होती हैं और आगे चलकर यह गंभीर बीमारी में बदल जाती है।

कौन-सा शुद्ध होता है दूध

गाय के दूध में 3-4 प्रतिशत वसा होती है, वहीं भैंस के दूध में 7-8 प्रतिशत वसा होती है। भैंस का दूध गाढ़ा होता है, इसलिए इसे पचाने में अधिक समय लगता है, जबकि गाय का दूध हलका और पचाने में आसान होता है, इसलिए गाय का दूध बच्चों और बुजुर्गों के लिए अच्छा माना जाता है। बकरी का दूध कौशिका वृद्धि को बढ़ाता है।

दूध में मिलावट को सख्ती से रोका जाए : सामाजिक कार्यकर्त्ता

समाज सेवी बालकृष्ण शर्मा ने मांग की है कि दूध में मिलावट को खत्म किया जाए। अगर लोग शुद्ध दूध का पैसा खर्चते है तो फिर उन्हें मिलावटी दूध क्यों मिले। लोगों का साफ तौर से कहना है कि पंजाब सरकार को मिलावट खोरों के खिलाफ कड़ा अभियान चलाना चाहिए, क्यों कि ऐसे लोग अपने लाभ के साथ लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे है। उन्होंने सेहत विभाग से अपील की है कि जैसे वो दीपावली के त्यौहार के नज़दीक सरगर्म होता है, अगर वो उसी प्रकार से समय-समय पर सभी खाघ प्रदार्थों को लेकर चैकिंग अभियान चालात रहे तो फिर काफी मिलावट खोर शिकंजे में आ सकते है।

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