Edited By Sunita sarangal,Updated: 18 Apr, 2026 03:59 PM
महिला ने आम आदमी पार्टी के विधायक मदन लाल बग्गा पर उसके अधिकार वाले प्लॉट में दखल देने और कब्जे की कोशिश करने के आरोप लगाए हैं।
लुधियाना(गणेश/सचिन): लुधियाना के सलेम टाबरी इलाके में एक प्लॉट को लेकर उठा विवाद अब बहुआयामी रूप ले चुका है, जिसमें राजनीतिक, प्रशासनिक और स्थानीय स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। एक महिला द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद मामला सुर्खियों में आ गया है, जबकि संबंधित पक्षों के बयानों ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है।
महिला ने आम आदमी पार्टी के विधायक मदन लाल बग्गा पर उसके अधिकार वाले प्लॉट में दखल देने और कब्जे की कोशिश करने के आरोप लगाए हैं। महिला के अनुसार, यह प्लॉट उसकी बुआ की लड़की के ससुर का है, जो भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं और वर्तमान में दिल्ली में निवास कर रहे हैं। उक्त संपत्ति की देखरेख के लिए उसे पावर ऑफ अटॉर्नी दी गई है। महिला का कहना है कि पिछले करीब तीन वर्षों से यह मामला विवादित चल रहा है, लेकिन अब हालात अचानक बिगड़ गए हैं।
महिला ने आरोप लगाया कि बिना किसी अनुमति के उसके खाली पड़े प्लॉट में झूले लगाए जा रहे हैं और कुर्सियां रखी जा रही हैं, जिससे जमीन को सार्वजनिक उपयोग में बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उसने इसे पूरी तरह गैरकानूनी बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है।
दूसरी ओर, विधायक मदन लाल बग्गा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि संबंधित जमीन सरकारी है और राजस्व रिकॉर्ड (फरद) में दर्ज है। उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाएगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि जमीन सरकारी पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, जबकि निजी होने की स्थिति में जमीन संबंधित व्यक्ति को सौंप दी जाएगी।

इसी बीच, डिप्टी मेयर आर.डी. शर्मा ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि उन्हें फिलहाल पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन यदि जमीन निजी है तो नगर निगम का वहां हस्तक्षेप करना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि प्राइवेट जमीन पर इस प्रकार की गतिविधियां पाई जाती हैं तो यह “धक्का” माना जाएगा और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वह स्वयं इस मामले की गहन जांच करवाएंगे और अंत तक इसकी सच्चाई सामने लाएंगे।

वहीं SDO द्वारा दिए गए बयान ने मामले में नया मोड़ जोड़ दिया है। SDO के अनुसार, संबंधित कार्रवाई पटवारी द्वारा दिए गए निशान (डिमार्केशन) के आधार पर की गई है और प्रारंभिक तौर पर यह सामने आया है कि जमीन का एक हिस्सा सरकारी तथा एक हिस्सा निजी हो सकता है।
हालांकि, पटवारी का बयान इस स्थिति को और स्पष्ट करने के बजाय अनिश्चितता बढ़ाता है। पटवारी ने कहा कि वह राजस्व विभाग से हैं और उन्हें केवल ड्यूटी के तहत मौके पर भेजा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें मामले की पूरी जानकारी नहीं है और अंतिम स्थिति केवल पूरी डिमार्केशन प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

घटना के दौरान नगर निगम कर्मियों और पुलिस की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस का कहना है कि किसी को हिरासत में नहीं लिया गया, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि महिला को पुलिस अपने साथ लेकर गई थी। इस विरोधाभास ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल, विभिन्न पक्षों के परस्पर विरोधी दावों और बयानों के चलते मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है। इलाके में तनाव का माहौल है और स्थानीय निवासी निष्पक्ष तथा पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। अब सबकी नजर प्रशासन की अंतिम डिमार्केशन रिपोर्ट और आगामी कार्रवाई पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि जमीन का वास्तविक मालिकाना हक किसके पास है और इस विवाद का समाधान किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

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