Edited By Kalash,Updated: 11 Apr, 2026 05:18 PM

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 14 साल से लंबित भूमि अधिग्रहण घोटाले की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को कड़ी फटकार लगाई है।
बठिंडा (विजय वर्मा): पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 14 साल से लंबित भूमि अधिग्रहण घोटाले की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि बिना एफआईआर दर्ज कराए सीधे सीबीआई जांच की मांग करना कानून का दुरुपयोग है। गांव मंडी खुर्द (तहसील रामपुरा फूल) से जुड़े इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि भूमि अधिग्रहण के दौरान करीब 5.82 करोड़ रुपये का फायदा प्रभावशाली परिवारों को पहुंचाया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। याचिका में इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई थी।
अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद आज तक न तो कोई एफआईआर दर्ज कराई गई और न ही पुलिस या किसी जांच एजेंसी को औपचारिक शिकायत दी गई। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “पहले पुलिस के पास जाएं, FIR दर्ज कराएं, उसके बाद ही किसी केंद्रीय एजेंसी की जांच की मांग बनती है।” अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि 14 वर्षों तक मामले को लंबित रखना और सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना न्यायिक समय की बर्बादी है। कोर्ट ने कहा कि इस दौरान अन्य महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई।
सुनवाई में यह भी सामने आया कि सीबीआई ने 2014 में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन वह केवल न्यायालय के अवलोकन के लिए थी, न कि कार्रवाई के लिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि उस रिपोर्ट के आधार पर कोई स्वतः जांच शुरू नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे पहले संबंधित पुलिस या जांच एजेंसी के पास जाकर शिकायत दर्ज कराएं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ‘ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2014)’ का हवाला देते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध की जानकारी मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रारंभिक जांच की आवश्यकता हो तो वह 14 दिनों के भीतर पूरी की जानी चाहिए। वहीं, सात साल या उससे अधिक सजा वाले मामलों में बिना देरी एफआईआर दर्ज करना जरूरी होगा। लैंडफिल साइट को शिफ्ट करने की मांग पर कोर्ट ने राहत देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता 30 दिनों के भीतर बठिंडा के डिप्टी कमिश्नर को आवेदन दे सकते हैं। डीसी को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह 30 दिनों के भीतर कारण सहित निर्णय लें। अंत में हाईकोर्ट ने सख्त निर्देशों के साथ इस जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया।
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