Edited By Urmila,Updated: 13 Jun, 2026 12:08 PM

लुधियाना जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां युवक के पैरो तले जमीन खिसक गई। जानकारी के अनुसार एक युवक पर आरोप लगा है।
लुधियाना : लुधियाना जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां युवक के पैरो तले जमीन खिसक गई। जानकारी के अनुसार एक युवक पर आरोप लगा है कि वह नशेड़ी है जबकि उसने जीवन में कभी बीड़ी-सिगरेट तक नहीं पी, लेकिन फिर भी सरकारी रिकॉर्ड में उसे नशे का आदी दिखाया गया है। युवक के नाम पर निजी डी-एडिक्शन सेंटर से नशे की दवाएं तक जारी कर दी गईं, जबकि उसे इसकी कोई जानकारी नहीं थी।
यह खुलासा तब हुआ नवंबर 2025 में जब वह आर्म्स लाइसेंस लने के लिए डोप टेस्ट करवाने लुधियाना के सिविल अस्पताल पहुंचा तो आधार कार्ड जमा करवाते ही उन्हें बताया गया कि उनका नाम डी-एडिक्शन रजिस्ट्री पोर्टल में दर्ज है। बताया जा रहा है कि युवक गांव बीजा निवासी तरसेम भारद्वाज एक निजी कंपनी में कार्यरत है।
अस्पताल स्टाफ के अनुसार, तरसेम के नाम पर नशा मुक्ति उपचार के तहत बुप्रेनॉरफिन की करीब 98 गोलियां पहले ही जारी की जा चुकी थीं। इसी रिकॉर्ड के कारण उन्हें यह भी बताया गया कि आर्म्स लाइसेंस जारी नहीं हो सकता। इसी बीच तरसेम का कहना है कि उन्होंने कभी किसी तरह का नशा नहीं किया। बाद में कराए गए डोप टेस्ट में भी किसी नशीले पदार्थ की पुष्टि नहीं हुई, इसके बावजूद सरकारी सिस्टम में उनका नाम नशेड़ियों की सूची में बना रहा।
युवक ने इस मामले की शिकायत खन्ना के एसएसपी और डिप्टी कमिश्नर को दी। साइबर क्राइम सेल को जांच सौंपी गई, लेकिन तरसेम का आरोप है कि महीनों तक न तो उनका बयान दर्ज किया गया और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई। तरसेम के मुताबिक फरवरी 2026 में उनकी शिकायत यह कहकर बंद कर दी गई कि उनसे संपर्क नहीं हो पाया, वहीं अप्रैल 2026 में आरटीआई के जरिए मिले जवाब में उसी शिकायत को जांचाधीन बताया गया।
डिप्टी कमिश्नर के निर्देश पर एडीसी खन्ना की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच कमेटी भी गठित की गई। युवक कई बार कमेटी के सामने पेश हो चुका है, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। न्याय न मिलने पर तरसेम ने डीआईजी लुधियाना रेंज को शिकायत देकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर नशे की दवाएं जारी हो सकती हैं, तो यह सिर्फ पहचान चोरी नहीं, बल्कि नशे की दवाओं से जुड़े किसी बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है। तरसेम ने मांग की है कि यह साफ किया जाए कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग किसने किया, दवाएं किसे मिलीं और इस पूरे मामले में कौन-कौन शामिल है, ताकि भविष्य में किसी और के साथ ऐसा न हो।
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