सरकारी सिस्टम में बड़ी गड़बड़ी! आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल कर युवक को दिखाया ‘नशेड़ी’, आयोग ने तलब किए अधिकारी

Edited By VANSH Sharma,Updated: 24 Jun, 2026 12:20 AM

punjab human rights commission summons civil surgeon over serious allegations

पंजाब स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन (PSHRC) ने आधार कार्ड के गलत इस्तेमाल से एक बेकसूर व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में ‘नशेड़ी’ दिखाने के गंभीर मामले में सिविल सर्जन, लुधियाना, डॉ. रमनदीप कौर को आयोग में तलब किया है।

लुधियाना (सहगल): पंजाब स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन (PSHRC) ने आधार कार्ड के गलत इस्तेमाल से एक बेकसूर व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में ‘नशेड़ी’ दिखाने के गंभीर मामले में सिविल सर्जन, लुधियाना, डॉ. रमनदीप कौर को आयोग में तलब किया है। 15 जून को जारी आदेश में सिविल सर्जन को 14 अगस्त को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य निदेशक और सिविल सर्जन ने नहीं लिया कोई एक्शन

कमीशन के आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि आयोग ने 9 जनवरी और 12 मार्च, 2026 को डायरेक्टर, हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर, पंजाब और सिविल सर्जन, लुधियाना को एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सौंपने के निर्देश दिए थे, लेकिन दोनों अधिकारियों की ओर से अब तक कोई रिपोर्ट जमा नहीं करवाई गई।

डोप टेस्ट के दौरान हुआ खुलासा

शिकायतकर्ता तरसेम भारद्वाज, निवासी बीजा गांव (खन्ना), जब अपने असला लाइसेंस के लिए डोप टेस्ट करवाने गए, तो उन्हें पता चला कि उनके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल किया गया है। आरोप है कि एक नशा मुक्ति केंद्र ने उनके नाम पर 98 गोलियां जारी कर दीं और सरकारी पोर्टल पर उन्हें नशेड़ी के रूप में दर्ज कर दिया।

200 दिन तक लगवाए चक्कर, फिर भी नहीं मिला न्याय

तरसेम भारद्वाज ने बताया कि इस मामले में उन्होंने मानवाधिकार आयोग और डीआईजी, लुधियाना रेंज से न्याय की गुहार लगाई थी। अब 15 जून को आए नए आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

तरसेम भारद्वाज ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजा जाए। उनका कहना है कि खन्ना स्थित डी-एडिक्शन सेंटर में उनके आधार कार्ड का बिना जानकारी के गलत इस्तेमाल किया गया और वहां से प्रतिबंधित गोलियां ली गईं। इन गोलियों की एंट्री भी उनके आधार नंबर पर, उनकी जानकारी के बिना, दर्ज कर दी गई।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP), खन्ना और डिप्टी कमिश्नर, लुधियाना को शिकायत दी थी। आरोप है कि खन्ना डी-एडिक्शन सेंटर द्वारा आधार कार्ड के गलत इस्तेमाल के बावजूद अधिकारियों ने कार्रवाई करने के बजाय हर बार उन्हें टालने का प्रयास किया और बिना बताए उनकी शिकायत को दफ्तर में दाखिल कर दिया।

RTI लगाई, फिर भी नहीं मिला जवाब

तरसेम ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक इंतजार किया, अपनी शिकायत को लेकर पुलिस अधिकारियों के चक्कर लगाए, लेकिन हर बार कोई न कोई बहाना बना दिया गया। आखिरकार उन्हें कह दिया गया कि उनकी शिकायत बंद कर दी गई है। इसके बाद जब उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत आवेदन लगाया, तो जवाब मिला कि उनकी एप्लीकेशन अभी प्रक्रिया में है।

उन्होंने यह भी बताया कि डिप्टी कमिश्नर की ओर से पांच सदस्यों की कमेटी बनाई गई थी और वह कई बार कमेटी के सामने पेश भी हुए, लेकिन 200 दिन से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई फैसला नहीं हुआ। तरसेम का आरोप है कि न तो जिला प्रशासन और न ही पुलिस प्रशासन ने उन्हें न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए। आखिरकार मजबूर होकर उन्हें पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा, जिसके बाद अब न्याय की उम्मीद जगी है।

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